तमकुहीरोड। पिछले एक पखवाड़े से चल रहा पितृपक्ष रविवार को नदियों मे पवित्र स्नान और तर्पण, पिंडदान व श्राद्धकर्म के साथ संपन्न हुआ। बांसी नदी के शिवाघाट व गोलाघाट तो गंडक नदी के पिपराघाट, जंगली पट्टी, जवही दयाल, विरवट, बाक खाश, बाघा चौर, अहिरौलीदान सहित अन्य घाटों पर लोग जुटे और पवित्र स्नान कर अपने पितरों का तर्पण, पिंडदान और श्राद्धकर्म किया।
मान्यता है कि पितृपक्ष में पितृगण देवलोक से भूलोक में चले आते है। अपने परिवार के लोगों के आस पास ही रहते है। पितृ विसर्जन के दिन श्राद्धकर्म से संतृप्त हो कर भूलोक से देवलोक को जाते है। इस दिन लोगों ने नदियों के तट पर तर्पण व श्राद्धकर्म कर पंडितों को भोजन कराकर दान पुण्य करते है। अपने पितरों को संतृप्त करने वाला यह त्यौहार सेवरही, टिकुलिया, राजपुर खाश, मिश्रौली, सुमही संतपट्टी सहित अन्य गांवों मे भी परंपरागत आस्था के साथ मनाया गया।
पंडित नागेंद्रनाथ द्विवेदी का कहना था कि हिंदू धर्म मे इसका विशेष धार्मिक महत्व है। जो सनातन काल से चला आ रहा है। इस पखवाड़े में अपनी अपनी तिथियों के अनुसार तर्पण व श्राद्धकर्म के बाद पंडितों को भोजन करा कर दान पुण्य करने से पितृ लोगों को दोष से मुक्ति मिल जाती है।