पडरौना। भागदौड़ भरी दिनचर्या में कमर दर्द, गर्दन, घुटने, कंधे व अन्य जोड़ों की दर्द के रोगियों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ये समस्याएं कम उम्र के लोगों को भी कम समय में अपनी चपेट में ग्रसित कर रही हैं। इसकी मुख्य वजह लोगों का बिगड़ा लाइफस्टाइल है। इन बीमारियों में फिजियोथेरेपी बड़ी कारगर है। फिजियोथेरेपी कई बीमारियों को जड़ से खत्म कर सकती है।
सोमवार को विश्व फिजियोथेरेपी दिवस मनाया जाएगा। इस वर्ष की थीम स्वस्थ जीवन की नई दिशा है। विशेषज्ञों की मानें तो फिजियोथेरेपी दवाओं पर निर्भरता कम करने वाली एकमात्र चिकित्सा विधि है। चोट या सर्जरी के बाद रिकवरी में इसकी अहम भूमिका रहती है। कार्डियोवैस्कुलर कार्यप्रणाली और फेफड़ों की क्षमता को बढ़ावा देने में भी यह लाभदायक है।
फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. बरखा गुप्ता ने बताया कि रोजाना औसतन 30 से मरीज फिजियोथेरेपी करवाने पहुंच रहे हैं। मांसपेशियों की कमजोरी, लचीलेपन में कमी, टांगों और पैरों में दर्द व सुनापन, झुनझुनाहट या खिंचाव, हल्के से लेकर गंभीर दर्द जैसी समस्याएं मरीज यहां लेकर पहुंच रहे हैं। इस दर्द के कारण चलना फिरना, सोना, काम करना या रोजमर्रा की गतिविधियों में परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि सरवाइकल, माईग्रेन, लकवा, गठिया, फ्रेक्चर व आपरेशन के बाद जोड़ों का जाम होना, खेल के दौरान चोट, जिम में होने वाली चोटें, मांसपेशियों का खिंचाव व दर्द, छाती के रोग व अन्य समस्याओं को इस चिकित्सा विधि के माध्यम से ठीक करने में मदद मिलती है। फिजियोथेरेपी जीवनशैली संबंधी रोगों (जैसे मधुमेह, मोटापा, हृदय रोग, गठिया आदि) के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है।