डिपो बनने के करीब पांच वर्ष बाद भी पडरौना बस स्टेशन की व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। जिला मुख्यालय के इस बस स्टेशन पर यात्रियों के लिए न तो बैठने का प्रबंध है ना ही पेयजल का। बस के इंतजार में लोगों को घंटों तक इधर-उधर घूमना पड़ता है। यहां से यात्रियों को बसों की स्थिति समेत अन्य जानकारी भी नहीं मिलती है। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव से पहले पडरौना डिपो का उद्घाटन हुआ था। चुनाव नजदीक देख पडरौना बस स्टेशन में यात्रियों की सुविधा के लिए उद्घोषणा सिस्टम व टेलीफोन लाइन समेत कई अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। बस स्टेशन की सफाई भी होने लगी। साथ ही तीन दर्जन से अधिक नई बसों का संचालन शुरू हो गया। परंतु चुनाव बीतने के बाद धीरे-धीरे इस स्टेशन की सुविधाएं घटने लगीं। अब स्थिति यह है कि बस स्टेशन पूरी तरह से गंदगी की चपेट में है। परिसर में पेयजल के लिए तीन इंडिया मार्का हैंडपंप लगे हैं जिसमें से दो खराब हैं और एक से दूषित पानी निकलता है। बस स्टेशन परिसर में यात्रियों के बैठने का कोई इंतजाम नहीं है। स्टेशन के पुराने कार्यालय के पीछे सिमेंट के बेंच बने हैं, लेकिन वहां इतनी गंदगी रहती है कि यात्री वहां जाना भी नहीं चाहते। परिसर में दिन भर सूअर घूमते रहते हैं। अगल-बगल के घरों का कूड़ा व अन्य गंदा सामान भी स्टेशन परिसर में ही फेंका जाता है। शाम होते ही स्टेशन परिसर अंधेरे में डूब जाता है। लोगों का कहना है कि अंधेरा होने के नाते अराजक तत्व व नशे के आदी लोग इसका उपयोग करने लगते हैं, जिसके कारण यात्री रात को स्टेशन की बजाय सड़क पर खड़े रहना ही बेहतर समझते हैं।
इस संबंध में रोडवेज के एसएसआई रमेश सिंह का कहना है कि हैंडपंप की व्यवस्था ठीक कराने के लिए नगर पालिका परिषद को पत्र भेजा गया है। शेष सुविधाओं की व्यवस्था के लिए भी वरिष्ठ अफसरों को पत्र लिखा जा चुका है।
बरसात होते ही लग जाता है पानी
राष्ट्रीय राजमार्ग 28 बी के उच्चीकरण के बाद बस स्टेशन का तल सड़क से बहुत नीचे हो गया है। जलनिकासी का प्रबंध नहीं होने के कारण बारिश होते ही परिसर तालाब बन जाता है। बरसात के तीन महीने तो जलभराव के चलते यात्री मुख्य सड़क पर ही खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं।