पडरौना। मेडिकल कॉलेज में अब बेड के लिए मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग में बने वार्डों में बेड-टू-बेड ऑक्सीजन की सप्लाई पहुंचेगी। अब तक इसकी व्यवस्था नहीं थी। इसकी वजह से अधिकतर मरीजों को पुरानी बिल्डिंग के वार्डों में भर्ती करना पड़ता था। इसके चलते बेड को लेकर तीमारदारों को परेशानियों का सामना करना पड़ता था। भवन बनने के बाद से ऑक्सीजन प्लांट नहीं बन सका था।
मेडिकल कॉलेज में ऑपरेशन के बाद या गंभीर मरीजों को अभी तक नई बिल्डिंग में भर्ती नहीं किया जाता था, सामान्य मरीजों को ही नई बिल्डिंग के वार्डों में रखा जाता था। इसकी वजह बेड पर ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं की जा रही है। कुशीनगर के अलावा पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज और देवरिया से भी मरीज इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में पहुंचते हैं। बिल्डिंग बनने के बाद से ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगा था। इसके चलते मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही थी।
पुरानी बिल्डिंग के वार्डों में बेड कम हैं, क्यों कि जिला अस्पताल के मानक के अनुसार वार्ड बने थे। इसके सामने मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग के वार्ड में 400 से अधिक बेड हैं, लेकिन आक्सीजन की आपूर्ति वार्डों तक नहीं पहुंची थी। इसलिए इस बिल्डिंग में सिर्फ ओपीडी संचालित की जा रही थी। अब नई बिल्डिंग में मरीजों का ऑपरेशन भी होगा। डॉक्टरों का कहना है कि पुरानी बिल्डिंग की ओटी से ऑपरेशन के बाद मरीज को दूसरी बिल्डिंग में शिफ्ट नहीं किया जा सकता है। इस लिए पुरानी बिल्डिंग के वार्डों का ही उपयोग करना पड़ता था। ऑक्सीजन की आपूर्ति बेड तक होने के बाद नई बिल्डिंग में ही मरीजों का ऑपरेशन होगा।
वर्जन
काम शुरू हो गया है। नई बिल्डिंग के वार्डों में बहुत जल्द बेड-टू-बेड ऑक्सीजन की सुविधा शुरू हो जाएगी। इससे बेड की कमी दूर हो जाएगी और मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्य कर्मियों को भी सहूलियत होगी। -डॉ. दिलीप कुमार, सीएमएस