पडरौना। महिला विधेयक का विरोध देश की आधी आबादी के साथ विश्वासघात है। विधेयक का विरोध कर विपक्ष ने अपनी मानसिकता उजागर कर दी है।
ये बातें भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व सांसद डाॅ. रमापति राम त्रिपाठी ने कहीं। वे शनिवार को भाजपा कार्यालय में पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं को भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है। जिन्होंने इस ऐतिहासिक अवसर में बाधा डाली है, उन्हें आने वाले चुनावों में महिलाओं के कड़े आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि परिसीमन से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत का आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुरक्षित रहेगा और बढ़ेगा।
सपा जैसे विपक्षी दल कोटा के भीतर धर्म-आधारित आरक्षण की असांविधानिक मांग उठाकर प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं, जो तुष्टीकरण और ध्यान भटकाने का तकनीकी बहाना मात्र है।
बीते 16 और 17 अप्रैल को संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक पर हुई चर्चा देश के लोकतांत्रिक भविष्य और महिलाओं की भागीदारी से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर था। लेकिन इन दो दिनों में केवल एक विधेयक ही सदन में नहीं गिरा, बल्कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके देश की आधी आबादी की नजरों में हमेशा के लिए गिर गए। उन्होंने कहा कि ये दल लोकतंत्र के रक्षक होने का दिखावा करते हैं, लेकिन वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ और तुष्टीकरण के कारण महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित कर लोकतंत्र की मूल भावना को कमजोर कर रहे हैं। संवाद