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कजरी के साथ हुआ नौंवे लोकरंग का आगाज

Sat, 07 May 2016 11:51 PM IST
कुशीनगर
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कलाकारों की प्रस्तुति ने लोक कलाओं को जीवंत कर दिया। - फोटो : अमर उजाला
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फाजिलनगर। क्षेत्र के जोगिया जनूबीपट्टी गांव में आयोजित नौंवे लोकरंग का शानदार आगाज शनिवार की देर शाम को हुआ। क्षेत्रीय कलाकारों और अन्य स्थानों से आए कलाकारों की प्रस्तुति ने लोक कलाओं को जीवंत कर दिया। लोकरंग की स्मारिका के विमोचन से कार्यक्रम प्रारंभ हुआ। उसके बाद जोगिया जनूबीपट्टी गांव की हीरमती, फूलमती, सीरमती, शांति, गुजरी, उमरावती आदि ने पारंपरिक कजरी गीत सुनाकर पूर्वांचल से विलुप्त हो रहे इस लोकगीत को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया।
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इसके बाद गांधीनगर लखनऊ के पूनमनाथ, गोविंद नाथ, रंझा नाथ, अवधेशनाथ ने बीन वादन किया। झारखंड के पूर्व राजघराने की वर्तमान पीढ़ी की ओर से 1941 में लोक परंपराओं को संरक्षित करने के उद्देश्य से गठित श्री कलापीठ पैलेस सरायकेला के 18 लोक कलाकारों ने छऊ नृत्य प्रस्तुत कर लोगों में रोमांच पैदा कर दिया। इसके बाद पतार तेजपुर गाजीपुर के लोक कलाकार जीवनलाल तथा शिवजी गौड़ ने पारंपरिक गोड़ऊ नृत्य प्रस्तुत कर लोक कलाओं को संरक्षित करने का प्रयास किया।

इसके बाद जयपुर राजस्थान के दिलीप भट्ट की टीम ने राजस्थान की 250 वर्ष पुरानी लोक परंपराओं पर आधारित राजा गोपीचंद भर्तृहरि तमाशा प्रस्तुत कर लोगों का जोरदार मनोरंजन किया। इसकी प्रस्तुति करने वाली टीम के लोग कई पीढ़ियों से यह तमाशा दिखाते व सुनाते चले आ रहे हैं। अंत में विश्वा पटना की टीम ने फ णीश्वरनाथ रेणु की कहानी तीसरी कसम उर्फ  मारे गए गुलफ ाम नाटक का मंचन किया।
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नाटक में एक मृदंगिया के इर्दगिर्द पूरी कथा घूमती है, जिसमें हीरामन अपनी बैलगाड़ी पर चोरी का सामान लादकर बाजार में बेचता है लेकिन एक बार बाजार में छापा पड़ता है और वह पकड़ा जाता है। उसके बाद वह दो कसम खाता है कि जीवन में कभी भी चोरी का माल नहीं बेचेगा तथा अपनी बैलगाड़ी पर बांस नहीं लादेगा। वहां से छूटने के बाद वह बाजार में जाता है तो वहां नौटंकी हो रही थी और वह वहीं देखने लगता है।

आए दिन नौटंकी देखने के दौरान हीराबाई नामक नौटंकी वाली से उसे प्रेम हो जाता है और अपनी कमाई वह उसे ही देने लगता है। एक दिन वह कुछ सामान और पैसे लेकर वहां पहुंचता है तो पता चलता है कि वह नौटंकी वाले वहां से चले गए हैं। वह भागते भागते जब स्टेशन पहुंचता है तो वहां हीराबाई मिलती है और कहती है मेरा सौदा तो कहीं और हो गया है।

तुम अपने घर अपनी पत्नी के पास जाओ और उसके द्वारा दिए सभी पैसे वापस कर दिए। वहां हीरामन तीसरी कसम खाता है कि अपनी पत्नी के अलावा किसी से प्रेम नहीं करेगा और नाटक समाप्त हो जाता है।

कार्यक्रम का संचालन रीवा विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. दिनेश कुशवाहा ने किया। इस दौरान आयोजक सुभाषचंद्र कुशवाहा, प्रोफेसर मैनेजर पांडेय, रविभूषण, डॉ. केपी कुशवाहा, तैयब हुसैन, पंकज चतुर्वेदी, योगेंद्र याहुजा, हृषिकेश सुलभ, सुधीर विद्यार्थी, शिवमूर्ति, डॉ. आद्या प्रसाद द्विवेदी, अरविंद सिंह, मदनमोहन, डॉ. मुन्ना तिवारी, मनोज कुमार सिंह मौजूद रहे।
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