पांच में से चार शीतगृह बंद चल रहे
भंडारण की सुविधा मिले तो सब्जी किसानों को मिलेगा फायदा
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले की प्रमुख नकदी फसल गन्ना, धान और आलू के अलावा किसान सब्जी की भी खेती करते हैं। परंतु भंडारण की सुविधा नहीं होने से किसान परेशान हैं। पांच में से चार कोल्ड स्टोरेज बंद हैं। उद्यान विभाग नया कोल्ड स्टोरेज बनाने पर एक करोड़ रुपये का अनुदान दे रहा है। अगर कोल्ड स्टोरेज का निर्माण हो तो किसान सब्जी की खेती करके अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
कुशीनगर जिले में कुल 4559 हेक्टेयर में सब्जी की खेती होती है। किसानों ने इस वर्ष 1500 हेक्टेयर में आलू, 600 हेक्टेयर में टमाटर, एक हजार हेक्टेयर में गोभी और 800 हेक्टेयर में बैगन समेत अन्य सब्जियों की खेती की है। परंतु जिले में कोल्ड स्टोरेज की कमी होने से आलू और टमाटर की खेती करने से किसान कतरा रहे हैं। वर्ष 2016 में 1650 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने आलू की बुआई कर 35,650 मीट्रिक टन उत्पादन किया था। लेकिन भंडारण की सुविधा नहीं होने से किसानों को औने-पौने दाम पर आलू बेचना पड़ा था। इस वर्ष भी जिले में आलू की बुआई 1500 हेक्टेयर में की गई है। जबकि आलू की बुआई का रकबा बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर तमाम प्रयास चल रहे हैं। इस संबंध में प्रभारी जिला उद्यान अधिकारी रामनरायन सिंह ने बताया कि कसया में स्थापित राजकीय शीतगृह खराब है। इसे सही कराने के लिए विभाग को पत्र लिखा गया है। इसके अलावा निजी क्षेत्र के लोगों को शीतगृह स्थापित करने के लिए सरकार की तरफ से अनुदान की व्यवस्था है। इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है। विभाग की तरफ से जिले में आलू का क्षेत्रफल बढ़ाने के लिए भरपूर प्रयास किया जा रहा है।
भंडारण की सुविधा नहीं होने से आ रही दिक्कत
नेबुआ नौरंगिया ब्लॉक क्षेत्र के रामअवध गोभी और मटर की खेती करते हैं। इनका कहना है कि सब्जी की खेती में आमदनी तो है लेकिन कच्चा माल लंबे समय तक रखना कठिन है। इसके चलते कम मूल्य पर ही बेचने की मजबूरी है।
चरिघरवा के किसान अवधराज का कहना है की गन्ने की दुर्दशा देख सब्जी की खेती शुरू की थी। खेत से ही व्यापारी सब्जी खरीद लेते हैं। अगर ग्रामीण क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज होता तो हमारी उपज का उचित मूल्य मिलता।
सौरहा खुर्द के किसान ओमप्रकाश चौधरी केला, प्याज और आलू की खेती करते हैं। उन्होंने बताया की सहफसली खेती से कम लागत में कई फसल आसानी से हो जा रही है। लेकिन कच्ची फसल को रखने की व्यवस्था नहीं है।
सौरहा खुर्द के ही किसान रामप्रीत कुशवाहा का कहना है कि वह गन्ने की फसल में ही आलू की बुआई भी करते हैं। आलू का उत्पादन अच्छा भी होता है, लेकिन तैयार होने के बाद उसे रखना सबसे बड़ी चुनौती का काम है।
मिलता है एक करोड़ तक अनुदान
एक कोल्ड स्टोरेज की स्थापना पर करीब पांच करोड़ रुपये की लागत आती है। इसमें से 35 प्रतिशत या एक करोड़ रुपये (जो अधिक हो) सरकार की तरफ से अनुदान दिया जाता है। यदि किसान आवेदन करते हैं तो प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा। वर्ष 2019 में खड्डा क्षेत्र के एक किसान ने कोल्ड स्टोरेज के लिए आवेदन किया था। इनके आवेदन पर प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन किसी वजह से यह प्रस्ताव शासन स्तर पर स्वीकृत नहीं हुआ, जिससे इसका निर्माण लटक गया।
जिले में स्थापित कोल्ड स्टोरेज की वास्तविक स्थिति
कोल्ड स्टोरेज क्षमता (एमटी) स्थिति
भुवनेश्वरी शीतगृह कठकुइया 1800 2005 से बंद
राजकीय शीतगृह कसया 2000 1999 से बंद
रामकोला शीतगृह रामकोला 1250 1998 से बंद
सहकारी शीतगृह फाजिलनगर 4000 1995 से बंद
लारी कोल्ड स्टोरेज कसया 2200 चालू