पडरौना। पशुओं को लंपी वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए पशुपालन विभाग की तरफ से चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान की रफ्तार काफी सुस्त है। जिले में कुल 82,238 गोवंश पंजीकृत हैं, लेकिन अभियान शुरू होने के 35 दिन बीत जाने के बाद भी विभाग सिर्फ 32,235 गोवंश को ही टीका लग सका है। यह कुल लक्ष्य का सिर्फ 39.2 प्रतिशत है। ऐसे में 50,000 से अधिक गोवंश (60.8 फीसदी) अब भी खतरे की जद में हैं।
पशुपालन विभाग को गोवंशों के बचाव के लिए शासन स्तर से लंपी रोधी टीके (एलएसडी) की 72 हजार डोज उपलब्ध कराई गई थी। पर्याप्त मात्रा में वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद टीकाकरण की रफ्तार सुस्त बनी हुई है। लंपी (स्किन डिजीज) की रोकथाम के लिए 11 अगस्त से सघन टीकाकरण अभियान की शुरुआत की गई है। इसके तहत गांवों में शिविर लगाकर टीकाकरण करने और पशुपालकों को जागरूक करने का दावा किया जा रहा है। विभाग के मुताबिक, क्षेत्र में 24 टीमें काम कर रही हैं। दूर-दराज के इलाकों में त्वरित पहुंच के लिए तीन मोबाइल वेटरनरी यूनिट (एमवीयू) भी लगाई गई हैं। टीकाकरण की रफ्तार धीमी होने के चलते प्रतिदिन औसतन 1,000 गोवंश को भी टीका नहीं लग पा रहा है। जानकारों का कहना है कि अगर रफ्तार नहीं बढ़ाई गई तो बचे 50 हजार गोवंशों के टीकाकरण में लंबा समय लगेगा।
कोट:-
मौसम और जलभराव के कारण कुछ क्षेत्रों में टीकाकरण की गति प्रभावित हुई थी। सभी 24 टीमों को हर रोज लक्ष्य बढ़ाकर जल्द से जल्द बचे हुए गोवंश को टीका लगाने के निर्देश दिए गए हैं। टीके की कोई कमी नहीं है। -डाॅ. शांति प्रकाश द्विवेदी, सीवीओ, कुशीनगर