फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अभी 18 फीसदी ही हो सकी गेहूं की खरीद

विज्ञापन
विज्ञापन
अभी 18 फीसदी ही हो सकी गेहूं की खरीद
विज्ञापन

अंतिम तिथि है 15 जून, जिले में बने हैं 76 क्रय केंद्र, बाजार में बिक गया गेहूं
47 हजार मीट्रिक टन खरीदने का लक्ष्य है, 8,478 मीट्रिक टन ही हो सकी है खरीद
संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। मौजूदा विपणन वर्ष में 15 जून तक ही गेहूं खरीदा जाना है लेकिन 76 क्रय केंद्रों के माध्यम से अभी तक सिर्फ 8,478.67 मीट्रिक टन ही गेहूं खरीदा जा सका है। जबकि, इस साल शासन से 47 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य मिला था। वजह यह रही कि इस साल बाजार भाव समर्थन मूल्य से अधिक होने के कारण किसानों ने सरकारी क्रय केंद्रों के प्रति रुचि नहीं दिखाई।
जनपद में एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद सत्र समाप्ति के करीब तक भी रफ्तार नहीं पकड़ पाई। गांव-गांव भ्रमण कर किसानों को जागरूक करने का भी असर नहीं दिख रहा है। हाल यह है कि 72 क्रय केंद्रों पर लक्ष्य के सापेक्ष महज 2569 किसानों से 18.04 प्रतिशत यानी 8,478.67 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है।
विज्ञापन

अब तक 1,708.45. लाख रुपये की खरीद में किसानों को 1570.17 लाख रुपये का ही भुगतान हुआ है। नियमत: किसानों के खाते में 24 से 48 घंटे में बेचे गए गेहूं की धनराशि पहुंच जानी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। दूसरी ओर विभाग का दावा है कि पहले की अपेक्षा अब खरीद में तेजी आई है।
किस एजेंसी से कितना गेहूं खरीदा
एजेंसी का नाम खरीदे गए गेहूं की मात्रा
खाद्य विभाग की खरीद एजेंसी पर 4281.16 मीट्रिक टन
भारतीय खाद्य निगम 60.75 मीट्रिक टन
पीसीएफ 3440.30 मीट्रिक टन
पीसीयू 335.66 मीट्रिक टन
यूपीएसएस 360.80 मीट्रिक टन
समर्थन मूल्य बढ़ने के बाद भी खरीद में तेजी नहीं आई
शासन स्तर पर गेहूं का समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। पिछले वित्तीय वर्ष में यह 1925 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके बावजूद किसानों की रुचि सरकारी क्रय केंद्रों की तरफ नहीं बढ़ी।
70 दिनों में सिर्फ नौ किसानों से हुई गेहूं खरीद
तमकुही तहसील क्षेत्र के साधन सहकारी समिति पिपरा कनक को गेहूं क्रय केंद्र बनाया गया है। एक अप्रैल से गेहूं की खरीदारी शुरू हुई है लेकिन इस क्रय केंद्र पर 70 दिनों में सिर्फ नौ किसानों से 338 क्विंटल गेहूं की खरीदारी हुई है। प्रभारी सचिव प्रेम सागर मिश्र ने बताया कि सिर्फ 338 क्विंटल गेहूं की खरीदारी हुई जबकि सुबह से क्रय केेंद्र खुला रहता है। किसानों का इंतजार किया जा रहा है।
गेहूं कटने के बाद किसान के पास पैसे का अभाव रहता है। गेहूं की कटाई देनी रहती है। इसीलिए बिचौलियों को मजबूरी में गेहूं को बेच दिया जाता है।
-अरविंद राय, जवार भैसहा
सरकार को किसानों का गेहूं का विक्रय का भुगतान त्वरित रूप से कर देना चाहिए। ताकि अधिक से अधिक क्रय केंद्र पर ले जाकर गेहूं बेच सके।
-बाबूराम प्रसाद, देवरिया वृत
क्रय केंद्रों पर जाने पर वहां का संचालक बोरा के लिए किसानों को दौड़ाता है। दस दिन बाद आने के लिए कहता है। दोबारा जाने पर कोई और बहाना कर देता है।
-राजन राय, सपही
गेहूं कटने के बाद क्रय केंद्र पर जाने पर महीनों दिनों तक वहां का सचिव दौड़ाता है। वहीं, बिचौलियों का गेहूं खरीद लेता है। इससे किसानों को गेहूं बेचने में मशक्कत करनी पड़ती है।
विज्ञापन

-रहीम अंसारी, सपही
वर्जन-
इस साल गेहूं का बाजार मूल्य अधिक था। इसलिए किसानों का अधिकतर गेहूं बाजार में ही बिक गया। इस वजह से लक्ष्य के अनुरूप गेहूं की खरीद नहीं हो पाई। एजेंसियों से गेहूं खरीद की समीक्षा की जाएगी।
-देवीदयाल वर्मा, गेहूं खरीद प्रभारी/एडीएम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें