पडरौना। राजकीय मेडिकल कॉलेज के नई बिल्डिंग में आक्सीजन का अभी तक कनेक्शन नहीं जुड़ सका है। इसलिए इमरजेंसी वार्ड या गंभीर रोगियों को इसमें भर्ती नहीं किया जा सकता है। नई बिल्डिंग को आक्सीजन कनेक्शन से जोड़ने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रशासन से उत्तर प्रदेश कारपोरेशन लीमिटेड (यूपीसीएल) से संपर्क किया था, इसका खर्च 83 लाख रुपये कंपनी की ओर से बताया गया है जो मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार बहुत अधिक है। अब दूसरे कंपनी से इसके लिए वार्ता चल रही है। आक्सीजन कनेक्शन से जुड़ने में करीब दो माह लग सकते हैं, इसलिए पुराने बिल्डिंग में ही गंभीर रोगियों को अभी भर्ती किया जाएगा।
मेडिकल कॉलेज की नई बिल्डिंग के प्रथम तल पर अभी सिर्फ ओपीडी चल रहा है। वार्ड, इमरजेंसी या ऑपरेशन के बाद रोगियों को भर्ती रखने की चल रही तैयारियों पर फिलहाल विराम लग गया है। करीब एक माह पूर्व मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने आक्सीजन प्लांट से नई बिल्डिंग में आक्सीजन कनेक्शन देने के लिए यूपीसीएल से संपर्क किया था। सर्वे के बाद कंपनी की ओर से 83 लाख रुपये खर्च बताया गया। बाकी कंपनियों से जब मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संपर्क किया तो पता चला कि इसके आधे खर्च में इतना काम हो जाएगा। इसके बाद यूपीसीएल को मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने मना कर दिया है। बिल्डिंग में जब तक बेड टू बेड आक्सीजन की सप्लाई नहीं होगी तब तक इसमें ऑपरेशन के बाद वाले या गंभीर मरीजों को भर्ती नहीं किया जा सकता है, हलांकि मेडिकल कॉलेज प्रशासन को यह अनुमान था कि इसी महीने में आक्सीजन कनेक्शन से वार्ड जुड़े जाएंगे और इसमें मरीजों को शिफ्ट कर ऑपरेशन भी शुरू करा दिया जाएगा, लेकिन इसमें यूपीसीएल की ओर से भेजे गए एस्टीमेट के बाद से मेडिकल कॉलेज प्रशासन का प्लान फेल हो गया। अभी इसमें दो महीने लग सकते हैं। प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने बताया कि यूपीसीएल की ओर से दोगुना खर्च आक्सीजन कनेक्शन देने के लिए मांगा जा रहा है। उतना बजट खर्च नहीं किया जा कसता है। इसके लिए दूसरी कंपनी से वार्ता चल रही है। जल्द ही आक्सीजन कनेक्शन से जोड़ दिया जाएगा।