पडरौना। कुबेरस्थान सीएचसी के समीप संचालित एक क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई और उसकी कार्यशैली पर ही गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आठ जून को ही नायब तहसीलदार और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस क्लीनिक को सील किया था। चर्चा है कि जिस कमरे को टीम ने सील किया था, उसे छोड़कर दूसरे कमरे में फिर मरीजों को भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया है। बुधवार को दूसरे दिन भी सीएमओ के आदेश के बावजूद नोडल अफसर नहीं पहुंचे। पूरे दिन कुबेरस्थान सीएचसी के अधीक्षक डॉ. धीरज सिंह इंतजार करते रहे।
सूत्रों की माने तो आयुर्वेदिक दवा दुकान की आड़ में यह क्लीनिक वर्षों से संचालित हो रहा है। क्लीनिक में एक बर्खास्त महिला स्वास्थ्य कर्मी की देखरेख में मरीजों का इलाज किया जाता है। हाल के दिनों में यहां एक महिला का गर्भपात किया गया था, जिसकी बाद में तबीयत बिगड़ गई और उसे रेफर कर दिया गया। इस दौरान महिला की मौत हो गई थी। सूत्रों का कहना है कि परिजन कार्रवाई के लिए कुबेरस्थान थाने जाने निकले थे, लेकिन रास्ते में ही उन्हें समझाकर वापस लौटा दिया गया और मामला दबा दिया गया।
चर्चा यह भी है कि यह क्लीनिक वर्षों से स्वास्थ्य विभाग के एक प्रभावशाली अधिकारी की कथित सरपरस्ती में संचालित हो रहा है। बताया जाता है कि क्लीनिक का संचालन स्वास्थ्य विभाग से बर्खास्त हो चुकी एक पूर्व आशा कार्यकर्ता की देखरेख में हो रहा है। विभागीय गलियारों में भी यह सवाल उठ रहा है कि जब क्लीनिक को कई बार सील किया जा चुका है तो आखिर किसके संरक्षण में इसका संचालन दोबारा शुरू हो जाता है। सीएमओ के आदेश के बावजूद नोडल अफसर डॉ. आरडी कुशवाहा जांच के लिए दूसरे दिन नहीं पहुंचे। इससे नोडल अफसर की भूमिका सवालों के घेरे में है। सीएमओ डॉ. चंद्रप्रकाश ने बताया कि जांच कर प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आदेश दिया गया है। कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर जिम्मेदारों पर विभागीय कार्रवाई होगी।