पडरौना। रानी रेवती देवी की 1,503 एकड़ जमीन सरकार के खाते में दर्ज होने के बाद पुराने राजस्व नंबरों में बदलाव शुरू हो गया है। इसके लिए 100 से अधिक राजस्वकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। रिकॉर्ड रूम के अभिलेखों की मदद से सुधार किया जा रहा है। इसके बाद जमीनों की पैमाइश और बेदखली की कार्रवाई शुरू होगी।
रानी रेवती देवी का निधन 1984 में इलहाबाद वर्तमान में प्रयागराज में हो गया था। उनके निधन के बाद उनके करीब रहने वाले कई लोग कोर्ट में मुकदमा दाखिल कर वसीयत लिखने का दावा किए। वर्षों चले मुकदमे के बाद 14 अगस्त को एडीएम न्यायिक कोर्ट ने रानी रेवती देवी की 1,5.03 एकड़ को सरकार के खाते में दर्ज करते हुए जमीन से बेदखली की कार्रवाई शुरू कर दी है। हाईकोर्ट में चल रहे मुकदमे के दौरान डीएम को रिसीवर बनाया गया था, बावजूद इसके रानी रेवती देवी की जमीन जालसाज राजस्व अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर बेचते गए और पडरौना शहर में कई कालोनियां बन गईं।
फर्जीवाड़ा कर जमीन का खरीद फरोख्त करने वाले खुद के बचाव में हाथ पैर मार रहे हैं। इस खेल में कई प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व वैभव मिश्रा के निर्देश पर पुराने से फसली वर्ष खतौनी के जरिए नंबरिंग का काम शुरू हो गया है। एडीएम वित्त एवं राजस्व वैभव मिश्रा ने बताया कि 90 से अधिक गांवों में रानी रेवती देवी के नाम की जमीन है। राजस्व अभिलेखों में सुधार के लिए 100 से अधिक राजस्वकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है। नियमानुसार कार्रवाई को पूरा किया जा रहा है।