बिना स्कूली स्वेटर के स्कूली बच्चे।
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पडरौना। जिले में पिछले पांच दिनों से पड़ रही कड़ाके की ठंड में सबसे अधिक दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही है। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को ठिठुरते हुए पढ़ाई करनी पड़ रहा है। इसमें कुछ बच्चे अपने घर पहनने वाले स्वेटर पहनकर बिना ड्रेस कोड स्कूल पहुंच रहे हैं। इस वर्ष इन बच्चों को सरकार की तरफ से स्वेटर व जूता-मोजा भी मिलना था। स्वेटर की खरीद तो अब तक हुई ही नहीं, जूता-मोजा भी स्टोर की शोभा बढ़ा रहे हैं। अधिकांश स्कूलों में फर्नीचर नहीं होने की वजह से बच्चों को इतनी ठंड में भी फर्श पर बिछे मैट पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
जिले में 2379 प्राथमिक व 825 जूनियर हाईस्कूल हैं। इनमें करीब तीन लाख बच्चे पढ़ते हैं। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे निर्धन परिवारों के हैं। सरकार की तरफ से हर साल इन बच्चों को दो सेट यूनिफार्म मिलता है। इस वर्ष सरकार ने बच्चों को ड्रेस के अलावा स्वेटर और जूता-मोजा वितरित करने की भी व्यवस्था कर रखी है। जूता-मोजा की खरीद हो चुकी है और वितरण के लिए ब्लाकवार भेज भी दिया गया है, परंतु सत्यापन के अभाव में इसका वितरण नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा स्वेटर की खरीद का कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हो पाया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो नवम्बर के महीने में ही स्वेटर की खरीद होनी थी लेकिन निकाय चुनाव की वजह से इसमें दिक्कत आ गई।
परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष स्वेटर बंटना है लेकिन इस खरीद शासन स्तर पर ही होनी है। उम्मीद है कि जल्दी ही खरीद की प्रक्रिया पूर्ण कर स्वेटर वितरण के लिए मिल जाएंगे। इसके अलावा जिन ब्लाकों में जूता-मोजा की सैंपलिंग हो गई है वहां वितरण कराया जा रहा है। पडरौना ब्लाक में सैंपलिंग में देरी की वजह से वितरण नहीं हो पाया है। इस सप्ताह इसमें तेजी लाई जाएगी।
हेमंत राव, बेसिक शिक्षा अधिकारी।