पडरौना। खड्डा ब्लॉक के सोनबरसा में विकास कार्यों में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया है। जांच में नाली मरम्मत में 19 मीटर लंबाई कम पाई गई, बेड के ऊपर ही दीवारों का निर्माण कर अधिक भुगतान पाया गया। छठ घाट की सफाई-टेंट के नाम पर बिना अभिलेख के भुगतान दर्शाया गया। जांच आख्या के आधार पर डीएम ने निवर्तमान ग्राम प्रधान/प्रशासक को नोटिस जारी कर 15 दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। जवाब न देने पर वसूली और विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि ग्राम पंचायत सोनबरसा के दयानिधि मणि ने सात मार्च को संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायती पत्र देकर प्रधान और सचिव द्वारा कराए गए कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। डीएम ने परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण और अवर अभियंता से जांच कराई। जांच में रामकृत चौहान के घर से पोखरा तक नाली मरम्मत कार्य में मौके पर 19 मीटर लंबाई कम पाई गई।
आरोप है कि पुरानी नाली मरम्मत का गलत प्राक्कलन तैयार कर एमबी में कार्य से अधिक मात्रा दर्शाकर वास्तविक लागत से अधिक भुगतान कर लिया गया। शेष लंबाई में भी जगह-जगह दीवारों का मरम्मत और प्लास्टर दिखाया गया। पंचायत भवन के पास से पोखरे तक नाली निर्माण व मरम्मत में पूर्व की नाली के बेड के ऊपर ही दोनों दीवारों कादोबारा निर्माण कर प्लास्टर करा दिया गया।
जांच अधिकारी ने इसे अनियमितता मानते हुए वास्तविक व्यय से अधिक भुगतान के लिए प्रधान, ग्राम सचिव और माप करने वाले जेई (एमआई) को दोषी ठहराया। इसके अलावा ग्राम पंचायत सोनबरसा में छठ घाट पर सफाई कार्य और टेंट आदि लगाने के नाम पर कोई पत्रावली या व्यय का अभिलेख उपलब्ध नहीं कराया गया। इसके बावजूद भुगतान दर्शाए जाने का आरोप है। मामले में जांच के आधार पर डीएम ने निवर्तमान प्रधान ममता देवी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। डीपीआरओ ने बताया कि ग्राम प्रधान को भेजे गए नोटिस में साक्ष्यों सहित 15 दिन में जिला मजिस्ट्रेट/जिला पंचायत राज अधिकारी के समक्ष स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया गया है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो सरकारी धन का गबन मानते हुए वसूली समेत अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी।