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Kushinagar News: लोहरसन में महिला डॉक्टर नहीं, रोगी परेशान

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लोहरसन में इलाज कराने पहुंचे मरीज। संवाद
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सांथा। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहरसन में महिला डॉक्टर न होने से महिलाओं को इलाज कराने में समस्या हो रही है। यहां तीन माह से महिला डाॅक्टर नहीं हैं। क्षेत्रीय लोगों ने महिला डाॅक्टर तैनात किए जाने की मांग की है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोहरसन में तीन माह पहले तैनात महिला डाॅक्टर किरन त्रिपाठी पीजी की पढ़ाई करने गईं। तभी से महिला डाॅक्टर की तैनाती नहीं हुई है। महिलाओं को पुरुष डॉक्टरों से इलाज करवाने में झिझक हाेती है। ऐसी स्थिति में उन्हें शहर की महिला डॉक्टरों के संपर्क में जाना पड़ता है।
महिलाओं के प्रसव, ऑपरेशन सहित अन्य कार्य इस अस्पताल में किए जाते हैं। प्रसव कराने आने वाली महिलाओं को नर्सों के सहारे ही रहना पड़ता है तथा नर्सों की जानकारी पर ही इलाज किया जाता है। इसके कारण गंभीर स्थिति होने पर बाहर जाना पड़ता है। इस अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 100 से अधिक रोगियों का इलाज किया जाता है। इसमें महिलाओं की संख्या आधे से अधिक होती है। इसके बावजूद महिला चिकित्सक की न होने से महिला मरीजों को कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा इसका सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है।
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ग्रामीण कटरा गांव निवासी राजिंद्र, मुड़िया निवासी अयूब, महादेवा निवासी आकाश ने कहा कि सीएचसी में महिला चिकित्सक को पदस्थापित नहीं किया जाना, इस इलाके की महिलाओं के लिए छलावा है। गौबडौरी निवासी राजू, बेलवा निवासी श्यामलाल, पनवारे निवासी राजाराम ने कहा कि आर्थिक रूप से संपन्न महिला मरीज जिला मुख्यालय में महिला चिकित्सक से अपना इलाज करवा लेती हैं। मगर आर्थिक संकट से जूझ रही क्षेत्र की महिला मरीज अपनी बीमारियों के इलाज के लिए सीएचसी जाती हैं, किंतु बिना इलाज के ही वह लौट जाती हैं। निवासी गौबडौरी सीत ने कहा कि अस्पताल में जाने पर हमेशा पुरुष चिकित्सक ही मिलते हैं। नर्स से सलाह लेने पर सही जानकारी नहीं मिल पाती है। इसके कारण निजी महिला चिकित्सक से इलाज कराना पड़ता है।
मोतीपुर की कुसुम ने कहा कि अस्पताल में महिला चिकित्सकों की कमी है, जिसके कारण हमलोगों को काफी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। मुसहरा की खुशबुन्निसा ने कहा कि महिला चिकित्सक की कमी के कारण हमलोगों को अस्पताल जाने में सोचता पड़ता है, क्योंकि अस्पताल में पुरुष चिकित्सकों द्वारा इलाज किया जाता है. लेकिन हमलोगों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
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