कुशीनगर में निजी अस्पताल की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। स्रोत -सोशल मीडिया
पडरौना। निजी अस्पतालों में आए दिन हो रही मौतों और मरीजों के इलाज में लापरवाही की मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए डीएम के निर्देश पर सोमवार को जांच अभियान चलाया गया। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की ओर से गठित आठ टीमों ने 52 निजी अस्पतालों पर पहुंचकर स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। टीमों की जांच में 30 निजी अस्पतालों में पंजीकृत डॉक्टर मौजूद नहीं मिले। इनमें कई में अप्रशिक्षित स्टाफ के भरोसे अस्पताल चलाया जा रहा था।
जांच के दौरान न केवल डॉक्टर ही नदारद मिले, बल्कि निश्चेतक और सर्जनों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा सुरक्षा को लेकर कमियां पाई गईं। इसमें 35 अस्पतालों में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर प्रवेश और निकास का एक ही रास्ता पाया गया। भारी खामियां मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने सभी संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर संबंधित अस्पतालों को सील करने और प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी दी गई है।
जांच अभियान के तहत गठित टीमों को 52 में से 30 निजी अस्पतालों में कोई भी पंजीकृत डॉक्टर मौजूद नहीं था। मरीजों का इलाज अप्रशिक्षित कर्मियों के भरोसे चल रहा था। इन अस्पतालों में ऑपरेशन और गंभीर स्थिति के मरीजों को देने वाली एनेस्थीसिया और सर्जनों की ड्यूटी/ऑन-कॉल सूची और रिकॉर्ड पूरी तरह गायब मिला। अस्पतालों में भर्ती मरीजों की संख्या, उनकी बीमारी, दिए जा रहे इलाज का रिकॉर्ड और वहां कार्यरत कर्मचारियों की सूची मौजूद नहीं थी। जांच में 35 निजी अस्पतालों में आपातकालीन निकास की कोई व्यवस्था नहीं थी। प्रवेश और निकास का एक ही संकरा रास्ता पाया गया जो किसी भी हादसे के वक्त जानलेवा साबित हो सकता है।
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आठ टीमों का गठन कर 52 निजी अस्पतालों की जांच की गई है। 30 अस्पतालों में पंजीकृत डॉक्टर नहीं मिले हैं और 35 अस्पतालों में भवन और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया गया है। सभी संबंधित संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब न मिलने या अनियमितता साबित होने पर अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त कर उन्हें सील किया जाएगा और उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी। मरीजों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं होगा। -डॉ.चंद्रप्रकाश,सीएमओ,कुशीनगर