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जिले के नौ लोग डेंगू की चपेट में

Mon, 03 Oct 2016 12:01 AM IST
kushinagar
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अमर उजाला ब्यूरो
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कुशीनगर
 रामकोला और पडरौना ब्लॉक के विभिन्न गांवों में नौ लोग डेंगू की पुष्टि हुई है। इनमें छह लोगों का इलाज गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में चल रहा है, वहीं, एक मेडिकल कॉलेज, एक बीएचयू और एक व्यक्ति का इलाज पीजीआई में चल रहा है। इस बीमारी को लेकर संबंधित गांवों के लोग भयभीत हैं।
पडरौना क्षेत्र के नादह गांव के  ओमप्रकाश गोंड (38) और नीतिश गोंड (19) एक सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे। स्थानीय डॉक्टरों ने मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने की सलाह दी। वहां जांच में इन्हें डेंगू होने की पुष्टि हुई। दोनों का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा था, जहां से ओमप्रकाश को उनके परिवार के लोग बीएचयू लेकर चले गए जबकि नीतिश का इलाज मेडिकल कॉलेज में ही चल रहा है। नादह निवासी मारकंडेय गौतम, प्रद्युम्र, गुड्डू, जवाहिर, रामनरेश आदि का कहना है कि बीमारी से बचाव के लिए गांव में स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई इंतजाम नहीं किया गया है।
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मथौली बाजार प्रतिनिधि के अनुसार रामकोला क्षेत्र के अंतर्गत कुसम्हा गांव के सुकवासी गांव के निवासी मुशाफिर (50), सुरेंद्र (35), कन्हैया (35), रगड़गंज निवासी रामा जायसवाल (40), गुड्डू प्रसाद (30), दिनेश मद्धेशिया (25) पिछले एक सप्ताह से बीमार थे। इलाज के बाद भी इनकी हालत निरंतर खराब होने पर परिवार के लोग इन्हें गोरखपुर ले गए, जहां निजी अस्पताल में इनका इलाज चल रहा है। इनके परिवार के लोगों ने बताया कि डेंगू से पीड़ित लोगों के सिर में तेज दर्द और बुखार हो रहा है। पहले उनका इलाज मथौली बाजार सीएचसी में कराया गया, जहां से निजी अस्पताल ले गए। गोरखपुर में जांच के दौरान इन लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है। 
रामकोला प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे की पुरानी बाजार निवासी राजा जायसवाल (35) भी डेंगू की चपेट में आ गए हैं। तेज बुखार और सिर में दर्द से पीड़ित होने पर परिवार के लोग उन्हें गोरखपुर निजी अस्पताल में ले गए, लेकिन वहां भी हालत में सुधार न होने पर डॉक्टर ने पीजीआई रेफर कर दिया। 
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इस संबंध में प्रभारी सीएमओ डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि संबंधित गांवों में दो बार स्वास्थ्य टीम भेजी जा चुकी है। इस तरह की बीमारी से पीड़ित लोग जिला अस्पताल में आकर अपना इलाज कराएं। सोमवार को इन गांवों में पुन: स्वास्थ्य टीम भेजी जाएगी। उन्होंने कहा कि डेंगू का मच्छर साफ पानी में अंडे देता है। अंडे से मच्छर बनने में एक सप्ताह का समय लगता है। पानी एकत्र न होने दें। यदि पांच-सात दिनों में गमले, कूलर और अन्य स्थानों का पानी बदलते रहें तो इसके मच्छर पैदा नहीं हो पाएंगे। बीमारी का इलाज कराने के  साथ ही बचाव के बारे में जानना भी जरूरी है।
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