पडरौना। विद्यार्थियों की अपार आईडी (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) बनाने में लापरवाह स्कूल और मदरसे शिक्षा विभाग के रडार पर हैं। शासन की प्राथमिकता वाले इस कार्य में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर संबंधित संस्थानों के विरुद्ध कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लापरवाही पर मान्यता प्रत्याहरण के साथ ही डायस कोड निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
जिले में परिषदीय, माध्यमिक, वित्तपोषित, मान्यता प्राप्त स्कूलों के साथ ही मदरसों को मिलाकर कुल 4838 शिक्षण संस्थान संचालित हैं। इन संस्थानों में अध्ययनरत 664213 विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार की जा रही है। अपार आईडी के माध्यम से विद्यार्थियों के शैक्षिक रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने और भविष्य में विभिन्न शैक्षिक सुविधाओं का लाभ दिलाने में सहूलियत होगी। शिक्षा विभाग की ओर से विद्यालयों को विद्यार्थियों का डाटा निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपडेट कर अपार आईडी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बावजूद कई संस्थानों में कार्य की गति धीमी बताई जा रही है।
हालात यह हैं कि 21 अगस्त तक 383822 विद्यार्थियों यानी 57.79 प्रतिशत छात्र-छात्राओं की ही अपार आईडी बन सकी है। विभाग अब विद्यालयवार प्रगति की निगरानी कर रहा है। कम प्रगति वाले विद्यालयों के जिम्मेदारों से जवाब-तलब के साथ ही आवश्यक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। बीएसए अनिल कुमार सिंह ने बताया कि अपार आईडी विद्यार्थियों के शैक्षिक दस्तावेजों और उपलब्धियों को एक डिजिटल पहचान से जोड़ने की महत्वपूर्ण व्यवस्था है। किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी स्कूल और मदरसे निर्धारित समय में शत-प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी बनवाना सुनिश्चित करें, अन्यथा विभागीय कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा।