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गंडक नदी के कोप से खतरे में नरवाजोत बांध और चार साल पहले बनी सड़क

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नरवाजोत बांध पर जारी बचाव कार्य। - फोटो : KUSHINAGAR
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गंडक नदी के कोप से खतरे में नरवाजोत बांध और चार साल पहले बनी सड़क
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सेवरही। गंडक नदी के कोप से पिपराघाट समेत आसपास के गांवों को बचाने के लिए चार साल पहले बनी सड़क व बांध का वजूद अब खतरे में है। पिपराघाट के जीरो बंधे से नरवाजोत को जोड़ने वाली इस सड़क व बांध पर गंडक नदी पिछले 23 दिनों से कटान कर रही है। बाढ़ खंड के अभियंता फ्लड फाइटिंग के लिए कार्य तो खूब करा रहे हैं लेकिन कटान रोकने में सफल नहीं हो पा रहे हैं। नदी की तेज धारा बार-बार बचाव कार्य को बहा ले जाती है। अब तो ग्रामीण भी अनहोनी की आशंका से सहमे हुए हैं। हालांकि बाढ़ खंड के अभियंता बचाव कार्य को माकूल बताते हुए बांध की सुरक्षा का भरपूर दावा कर रहे हैं।
पिछली सपा सरकार में सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव एपी तटबंध का निरीक्षण करने आए थे तो यहां लोग बांध व सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे। तब सपा में रहे पूर्व विधायक डॉ. पीके राय के विशेष अनुरोध और ग्रामीणों के आंदोलन को देखते हुए सरकार ने 42 करोड़ रुपये की लागत से 3.200 किमी सड़क के लिए धन अवमुक्त किया था। लोक निर्माण विभाग व बाढ़ खंड ने सड़क व बांध का निर्माण कराया। सड़क बनने से पिपराघाट के दहारी टोला, तवक्कल टोला, भंगी टोला, तेजू टोला, चौकी पिपरा, हनुमान टोला, देवनारायन टोला, मुसहरी आदि गांव नरवाजोत बांध से सीधे जुड़ गया। इसके अलावा पश्चिमी चंपारण जिले के ठकरहा प्रखंड के कई गांव के लिए भी सुगम रास्ता मिल गया। इस वर्ष गंडक नदी सीधे इस रास्ते जैसे बांध से टकरा रही है। कटान शुरू होने पर बाढ़ खंड की ओर से बचाव कार्य शुरू कराया गया। विभागीय अभियंताओं की मानें तो बचाव कार्य पर अब तक लगभग 15 लाख से अधिक बैग व बोल्डर यहां गिराए जा चुके हैं। यहां से 10 किमी दूर से मुख्य पश्चिमी गंडक नहर के पटरी पर रखे गए सिल्ट को बोरियों में भरकर यहां लाया जा रहा है। इस काम में 69 ठेकेदारों को लगाया गया है। इसके बावजूद कटान नहीं रुका है।
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सोमवार को मची थी अफरातफरी
सोमवार की दोपहर में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बंधे पर बचाव कार्य का जायजा लिया था। उनके आने से पहले ही यहां कटान तेज हो गई। जैसे-तैसे बोरे रखकर कटान की गति धीमी की गई। मंत्री ने मौके पर अभियंताओं से कार्य में और तेजी लाने को कहा था। उनके जाने के बाद रात में बंधे का निचली हिस्सा लगभग 15 मीटर लंबाई में कट गया। मंगलवार दोपहर में दहारी टोले के पास फिर से 10 मीटर हिस्सा कट गया। ग्रामीण पुजारी सिंह, दूधनाथ शर्मा, संजय, ब्रम्हा शाह, रमाकांत शर्मा, चंद्रबली, जगदीश गुप्ता, मुखलाल सिंह, झोटिल चौहान, बालकृष्ण सिंह, चंद्रमा चौहान आदि ने बताया कि वे लोग खुद अपने गांव को बचाने के लिए बचाव कार्य की निगरानी कर रहे हैं। इस संबंध में बाढ़ खंड के सहायक अभियंता कुमार आमोद ने बताया कि 24 घंटे बचाव कार्य कराया जा रहा है। सड़क व बांध को बचाने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। गंडक नदी का जलस्तर घटने पर कटान तेज होता है। यहां नदी की धारा सीधे बांध की तरफ होने से दिक्कत आ रही है।
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