सुकरौली। हाटा कोतवाली के धनहा गांव निवासी सफाईकर्मी योगेश की संदिग्ध मौत का मामला उलझता जा रहा है। अब जांच का केंद्र केवल घटनास्थल से मिला मोबाइल नहीं, बल्कि गुमशुदगी की तिथि, शव बरामद होने का समय और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले संकेत भी बन गए हैं। इन तीनों तथ्यों में मिलान नहीं होने से घटनाक्रम रहस्यमय हो गया है। फिलहाल पुलिस मोबाइल की सीडीआर का इंतजार कर रही है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, योगेश के 17 जून से लापता होने की बात सामने आई थी और कुछ दिन बाद उसका शव मिला। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शव की स्थिति को लेकर मिले संकेत का घटनाक्रम से मिलान किया जा रहा है। पुलिस अब गुमशुदगी का वास्तविक समय, मोबाइल की कॉल डिटेल, अंतिम लोकेशन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़कर जांच आगे बढ़ा रही है। क्षेत्र में योगेश की गुमशुदगी की तिथि को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। हालांकि इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कसया सीओ कुंदन सिंह ने बताया कि डीएनए जांच कराई जा रही है। मोबाइल की मदद से ही पूरे घटनाक्रम से पर्दा उठ सकता है। अभी सीडीआर नहीं आई है। सीडीआर आने के बाद कुछ कहा जा सकता है। उपलब्ध वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक बिंदु का परीक्षण किया जा रहा है।
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कंकाल जैसी स्थिति भी बनी चर्चा का विषय
घटनास्थल पर शव जिस अवस्था में मिला, वह भी चर्चा का विषय है। स्थानीय लोग इस बात पर सवाल उपा रहे हैं कि शव की स्थिति और घटनाक्रम की समय-सीमा का आपसी संबंध क्या है। हालांकि, इन सभी पहलुओं की पुष्टि वैज्ञानिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के विस्तृत परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। पुलिस भी इस बिंदु को जांच के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देख रही है।