लक्ष्मीगंज। रामकोला स्थित मां सम्मे स्थान परिसर में आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ में रविवार को कथा वाचक ने मां विंध्यांचल देवी की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि मां विंध्यवासिनी, भगवान श्रीकृष्ण की बहन हैं। सच्ची श्रद्धा से उनका स्मरण करने मात्र से जीवन का सारा संकट दूर हो जाता है।
कथा वाचक राकेश दीक्षित ने कहा कि मिर्जापुर जिले में स्थित मां विंध्याचल देवी का मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है। यह गंगा नदी के तट और विंध्य पर्वत पर स्थित हैं। उन्होंने कहा कि मां विंध्यवासिनी भक्तों की रक्षा और दुष्टों के विनाश के लिए अवतार लिया था। पुराणों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय कंस ने जिस कन्या को मारने का प्रयास किया था, वही देवी आकाश में प्रकट होकर बोलीं कि तुझे मारने वाला जन्म ले चुका है। भगवान श्रीकृष्ण की बहन विंध्य पर्वत पर आकर विंध्यवासिनी के रूप में स्थापित हुईं। नवरात्रि पर विंध्याचल धाम में विशेष पूजा-अर्चना होता हैं, मान्यता है कि सच्चे मन से मां विंध्यवासिनी की आराधना करने पर सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
इस दौरान आयोजक छोटेलाल दास, पप्पू यादव, घनश्याम वर्मा, सुशीला देवी, मनोज शाही, महेंद्र कुशवाहा, सतीश शर्मा, रमेश यादव आदि मौजूद रहे।