मौत के बाद दरवाजे से टेंट उतारते मजदूर। संवाद
तमकुहीराज। स्थानीय थाना क्षेत्र के हाईवे पर गाजीपुर बैरियर के पास अज्ञात वाहन की चपेट में आने से एक महिला की मौत हो गई। महिला के बेटे का तिलक रविवार की शाम को था। इसकी तैयारी में पूरा परिवार जुटा था। वह अपने पटीदारी की महिलाओं को बुलाने जा रही थी। इसी बीच घर के पास ही हादसा हो गया। इस हादसे से परिवार में मातम छा गया और चीख-पुकार मच गई।
तमकुहीराज थाना क्षेत्र के गाजीपुर बैरियर टोला निवासी ध्रुव प्रसाद के दो बेटे हैं। बड़े बेटे की शादी कुछ वर्ष पूर्व हो चुकी है। छोटे बेटे छोटू का तिलक रविवार की शाम को चढ़ना था, इसकी तैयारी सुबह से चल रही थी। तिलक से पूर्व होने वाली रस्म मंगल गीतों के बीच पूरा कर लिया गया था। शाम को सड़क उस पार बने पटीदारों के घर पैदल ध्रुव प्रसाद की 45 वर्षीय पत्नी लालदेई महिलाओं को बुलाने शाम को करीब 6.30 बजे जा रही थीं। इस दौरान तेज रफ्तार से आ रहे अज्ञात चार पहिया वाहन ने ठोकर मार दिया।
गंभीर रूप से घायल लालदेई को परिजन तमकुहीराज सीएचसी पर लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसकी खबर मिलते ही तिलक का उत्साह मातम में बदल गया। इस घटना के बाद गांव में भी उदासी छा गई। थानाध्यक्ष तमकुहीराज सुनील कुमार वर्मा ने बताया शव को कब्जे में ले लिया गया है। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
तिलक के मुहुर्त से दो घंटे पहले मां की उठी अर्थी
तिलक चढ़ने का मुहुर्त 8.30 बजे का था। लगभग तैयारी पूरी कर ली गई थी। सुबह से ही मंगल गीतों के बीच बाकी रस्म पूरा करने में परिवार के सदस्य और रिश्तेदार जुटे थे, मेहमानों को दोपहर बाद से ही दरवाजे पर आना-जाना लगा रहा, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। पूरा माहौल खुशनुमा रहा, भोजन और नास्ता तैयार करने में लोग लगे रहे। अचानक शाम को सूचना आई कि लालदेई हादसे में घायल हो गईं। सीएचसी पर परिजन ले गए तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। लालदेई अपने बड़े बेटे की शादी कर चुकी थीं, छोटे बेटे की शादी कर जिम्मेदारियों से मुक्ति पाने वाली थीं। हाईवे पार कर रही थीं तभी काल के गाल में समा गईं। वहीं रामपुर बरहन के टोला भवानीपुर से तिलक लेकर लोग निकल चुके थे। आधे रास्ते तक तिलक लेकर आए रिश्तेदारों को जानकारी हुई तो वे लौट गए, कुछ रिश्तेदार सीएचसी पर पहुंचे। इसके बाद तिलक का कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। दरवाजे पर गांव वालों की भीड़ जुट गई दहाड़े मारकर रो रही महिलाओं को आस-पास की महिलाएं संभाल रही थीं।