नौ हजार हेक्टेयर से अधिक गन्ने की फसल सूखी
पडरौना। प्रदेश सरकार के चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर शासन-प्रशासन की उपलब्धियों के बारे में जनता को बताया जा रहा है। किसानों के हित में संचालित योजनाओं पर भी ध्यान दिलाया जा रहा है, लेकिन बीते बरसात में अत्यधिक बारिश के चलते रेड राट रोग, उकठा रोग और सूखने से बर्बाद हुई 9330 हेक्टेयर गन्ना की फसल का मुआवजा अब तक किसानों को नहीं मिला। हालांकि गन्ना विभाग की तरफ से इसका सर्वे कराकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। मुख्यमंत्री ने इस मामले की जांच कराकर किसानों को मुआवजा दिलाने की बात कही थी, लेकिन बाद में इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई।
बीते बरसात में हुई अत्यधिक बारिश से गन्ना की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ। जनपद के गन्ना किसानों ने 91117 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ना की खेती की थी, लेकिन अतिवृष्टि और खेतों में ज्यादा दिनों तक जलभराव हो जाने के चलते 0238 प्रजाति का गन्ना काफी मात्रा में या तो सूख गया या रेडराट रोग अथवा उकठा रोग का शिकार हो गया। पिछले कई वर्षों से जनपद में गन्ना का क्षेत्रफल बढ़ाने वाली यह प्रजाति किसानों के लिए नुकसानदायक साबित हुई। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग की तरफ से गन्ना का सर्वे कराया गया और इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई, लेकिन पीड़ित किसानों को कुछ हासिल नहीं हुआ। डीसीओ वेदप्रकाश सिंह ने बताया कि रोग और सूखने से गन्ना की फसल को हुए नुकसान को देखते हुए डीएम एस. राजलिंगम की तरफ से पिछले सप्ताह शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में गन्ना को भी शामिल किए जाने की मांग की है।
रेड राट, उकठा रोग एवं जलभराव से हुई क्षति की चीनी मिलवार स्थिति (क्षेत्रफल में)
चीनी मिल रेड राट उकठा रोग जल प्लावित गन्ना की फसल
खड्डा 100 50 400
रामकोला 300 50 2200
ढाढ़ा 300 100 2000
कप्तानगंज 200 100 700
सेवरही 250 200 2000
पिपरइच 50 30 300
योग 1200 530 7600
किसान बोले- अधिक बारिश के कारण बर्बाद हो गई फसल
चरिघरवा के किसान मुखलाल कुशवाहा बताते हैं कि 40 कट्ठा खेत में उन्होंने गन्ना की खेती की थी, लेकिन ज्यादा बारिश के कारण खेत में पानी कई दिनों तक लगा रहा। इससे गन्ना की पूरी फसल सूख गई। काफी नुकसान हुआ है। सौरहा खुर्द गांव के किसान शंभू गुप्ता ने बताया कि एक एकड़ खेत में गन्ना की बुआई की थी। फसल तैयार होने को हुई, तब तक बरसात आ गई। इतनी अधिक बारिश हुई कि पूरी फसल बर्बाद हो गई। अमवा खास गांव के गन्ना किसान काशी कुशवाहा ने बताया कि तीन एकड़ गन्ना बोया था। खेत में कई दिनों तक पानी भरे होने के कारण दो एकड़ गन्ना बर्बाद हो गया। दशहवा गांव के निवासी कमरुद्दीन ने बताया कि वह काफी समय से गन्ना की खेती करते हैं। इस बार दो एकड़ खेत में गन्ना की खेती किए थे, लेकिन अत्यधिक बारिश के कारण फसल सूख गई।
पिछले सितंबर-अक्तूबर में हुई अत्यधिक बारिश और जलभराव के चलते गन्ना की फसल को सर्वाधिक नुकसान हुआ। हर मौसम के लिए अनुकूल रही को-0238 प्रजाति के गन्ना की फसल अधिकांश किसानों ने बोया था। इस वजह से जनपद में 9330 हेक्टेयर क्षेत्रफल में यह फसल या तो रेड राट नाम के रोग का शिकार हो गई या उसे उकठा रोग लग गया। लंबे समय तक जलभराव के चलते भी गन्ना किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। अब इसकी जगह गन्ना की दूसरी प्रजातियों को 0118, को.शा. 8272, को.शा. 8279, को.शा. 13235 और को. लख. 14201 की खेती करने के लिए किसानों को जागरूक किया जा रहा है, क्योंकि अब तक इन प्रजातियों में रेड राट का प्रभाव नहीं देखा गया है।
वेद प्रकाश सिंह, जिला गन्ना अधिकारी