सुकरौली। रोजी-रोटी की तलाश में दूर-दराज के शहरों में गए क्षेत्र के मजदूर गैस संकट और बढ़ती महंगाई के कारण गांव लौटने लगे हैं। मजदूरों का कहना है कि शहरों में छोटे सिलिंडरों में भरी जाने वाली गैस की कीमत 400 से 500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है, जो उनकी आय के मुकाबले बेहद महंगी है। न तो खाना बनाने के लिए गैस मिल पा रही है और न ही काम के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध हैं।
पड़री के सुरेश बताते हैं कि पहले जैसे-तैसे काम चल जाता था, लेकिन अब गैस इतनी महंगी हो गई है कि खाना बनाना भी मुश्किल हो गया है। काम भी नहीं मिल रहा है। जो मिल रहा है, उसमें खर्च ज्यादा है। बचत कुछ नहीं हो रही है। गैस कटर का काम करने वाले दिलीप बताते हैं कि काम पूरी तरह प्रभावित हो गया है। काम के लिए भी गैस नहीं मिल रही है। ऐसे में शहर में रहना बेकार हो गया है। अरविंद कुमार भी इसी समस्या से जूझते हुए गांव लौट आए हैं। उनका कहना है कि गांव में भले ही कम साधन हैं, लेकिन कम से कम दो वक्त की रोटी और परिवार का साथ तो मिलेगा। पिड़रा के अमित ने कहा कि गैस संकट के साथ-साथ अन्य जरूरी सामान की कमी ने भी मजदूरों की परेशानियों को बढ़ा दिया है।