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मेडिकल कॉलेज : दलालों पर शिकंजा कसने को प्राचार्य ने डीएम-एसपी से मांगी मदद

Sun, 16 Nov 2025 01:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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मेडिकल कॉलेज गेट के पास खड़ी निजी एंबुलेंस। संवाद    
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कुशीनगर। मेडिकल कॉलेज प्रशासन सख्ती के लाख दावे कर ले पर दलालों का नेटवर्क खत्म होता नहीं दिख रहा है। दलाल अब भी ओपीडी से लेकर इमरजेंसी, एक्सरे, पैथालॉजी और वार्डों तक सक्रिय हैं। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज से गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए एक मरीज को निजी एंबुलेंस से प्राइवेट अस्पताल ले जाने की कोशिश का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर इस पर सवाल उठने लगे हैं। मेडिकल कॉलेज के कुछ कर्मचारियों के भी इन दलालों से सांठगांठ के मामले सामने आते रहे हैं जिसके बाद चेतावनी और नोटिस भी दिया गया। पर अब दलालों की सक्रियता पर अंकुश लगाने के लिए प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने डीएम और एसपी को पत्र लिखकर मदद की मांग की है। पत्र में प्राचार्य ने पडरौना शहर के कुछ निजी अस्पताल संचालकों का जिक्र किया है, जिनके इस खेल में शामिल होने का अंदेशा है।
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बताया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी और एमसीएच विंग भवन में संचालित महिला अस्पताल के आस-पास दलाल अक्सर मौजूद रहते हैं। गेट पर पहुंचने के बाद से ही हमदर्दी दिखाते हुए मरीजों को अपनी बातों में फंसा लेते हैं और पहले डॉक्टर से दिखाने, जांच कराने के नाम पर रुपये वसूलते हैं। अगर मरीज उसकी बातों में आ जाते हैं तो बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। जैसे मरीज होते हैं उस हिसाब से दलालों को कमीशन मिल जाता है। इस खेल में ड्यूटी पर तैनात गार्डों के अलावा कुछ स्वास्थ्यकर्मी और डॉक्टरों के भी शामिल होने का आरोप है। स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को गुमराह करने वाले दलालों के सामने मरीज या तीमारदार को सही सलाह देने की बजाए दलालों की बातों में हामी भरने लगते हैं या जुबान बंद कर लेते हैं।
इस बीच, शुक्रवार को कैंपस में निजी एंबुलेंस पकड़े जाने के बाद शनिवार को दिन में निजी अस्पतालों की एंबुलेंस तो नहीं नजर आई लेकिन शाम चार बजे के बाद दलाल व निजी अस्पतालों के एंबुलेंस पहुंच गए और सब कुछ पहले जैसा चलने लगा।
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100 रुपये में पर्ची, 100 रुपये में डॉक्टर को दिखाने की सहूलियत

शनिवार को खड्डा कस्बे से बच्चे का इलाज कराने आई बागेश्वरी देवी पत्नी रामा राजभर ने बताया कि पर्ची काउंटर पर भीड़ थी। वहां एक युवक मिला और 100 रुपये लेकर बच्चे की पर्ची बनवा दी। इसके बाद एक युवक को साथ लगा दिया। ओपीडी में भीड़ होने के बाद भी तुरंत बच्चे की डॉक्टर से दिखा दिया। इसके एवज में 100 रुपये लिए। कसया थाना क्षेत्र के नादे गांव निवासी रोझनी देवी को लेकर इनके बेटे मनोज आए थे। रोझनी देवी का पैर टूटा था। ह्वीलचेयर नहीं मिलने पर परिजन गोद में उठाकर उनको इमरजेंसी के पास कुर्सी पर बैठाए और पर्ची कटवाने के बाद एक्सरे कक्ष में ले गए। यहां भीड़ होने के चलते अगले दिन आने की बात वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मी ने कही। बाहर निकलने पर एक महिला दलाल इमरजेंसी के पास मिली। 200 रुपये लेकर आधे घंटे के अंदर एक्सरे करा दिया। मनोज ने बताया कि भाड़े के टेंपो से लेकर आया हूं, दूसरे दिन आने पर उतना भाड़ा लग जाता। इसलिए रुपये देकर एक्सरे करा लिया।
लक्ष्मीपुर की रहने वाली सुनीता अपने बुजुर्ग पिता मोतीचंद को लेकर टेंपो से आई थीं, साथ में रिश्तेदार भी रहे। इमरजेंसी के पास टेंपो रोककर ओपीडी में बीमार पिता को लेकर जाने के लिए ह्वीलचेयर के लिए इमरजेंसी में गई लेकिन ह्वीलचेयर नहीं मिला तो रिश्तेदारों की मदद से गोद में उठाकर दूसरी मंजिल पर इलाज के लिए ओपीडी में गईं। उनकी सांस फूल रही थी और बोल नहीं पा रहे थे। इसके पूर्व नगर के एक निजी अस्पताल में जेडी की ओर से आई स्वास्थ्य विभाग की जांच टीम को एक प्रसूता मिली। उसने टीम को बताया कि प्रसव के दौरान नवजात की मौत हो गई, पहले वह मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल में गई थी, वहां से डॉक्टर ने गुमराह कर निजी अस्पताल में भेज दिया है।

मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. आरके शाही ने कहा कि मेडिकल कॉलेज में सक्रिय दलालों पर अंकुश लगाने के लिए डीएम और एसपी को पत्र लिखकर मदद मांगी गई है। कैंपस में किसी भी हालत में निजी अस्पतालों की एंबुलेंस नहीं आने दी जाएगी। इसके लिए गार्डों को निर्देश दिया गया है। अगर निजी एंबुलेंस कैंपस में आती है तो इसके जिम्मेदार ड्यूटी पर तैनात गार्ड होंगे।
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