खड्डा। तहसील मुख्यालय को कहीं और स्थानांतरित होने की आशंका पर अधिवक्ताओं सहित अन्य लोगों में नाराजगी है। शुक्रवार को तहसील के वकीलों ने इसके विरोध में कार्य का बहिष्कार किया।
उसके बाद धरना देकर प्रशासन को चेतावनी दी। अधिवक्ताओं ने मुख्यमंत्री से लेकर डीएम तक पत्र भेजकर नगरपंचायत में ही तहसील मुख्यालय कायम रखने की मांग की है।
जिले के अंतिम छोर पर खड्डा नगरपंचायत को तहसील बनाने के लिए कई दशकों तक मांग होती रही। इसके लिए भाकियू कार्यकर्ताओं सहित क्षेत्र के लोगों ने एक महीने तक आंदोलन किया।
इतना सब होने के बाद 14 मार्च 2015 को मुख्यमंत्री ने कप्तानगंज और खड्डा को तहसील का दर्जा देकर क्षेत्रवासियों में उत्साह का संचार करा दिया। सिंचाई विभाग की जमीन में अस्थायी तहसील मुख्यालय बनाकर सभी कार्य किए जा रहे हैं।
अधिवक्ताओं का कहना है कि साजिश के तहत नगरपंचायत से दूर गंडक नहर के किनारे तहसील के स्थायी भवन के लिए प्रस्ताव भेजा गया है, जो पूरी तरह से अनुचित है।
इस कारण वादकारियों, अधिवक्ताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों सहित आम जनता को परेशानी होगी। अपनी मांगों को लेकर अधिवक्ताओं ने तहसील बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र जायसवाल, महामंत्री अनूप मिश्रा की अगुवाई में विरोध करने के लिए समय सारिणी तय की है।
इसके तहत पहले चरण में शुक्रवार को अधिवक्ताओं ने सभी कार्यों का बहिष्कार किया और एसडीएम ऑफिस के सामने धरना देकर सभा की। विरोध के अगले क्रम में नौ फरवरी को सामूहिक उपवास करने का निर्णय लिया गया है। 16 फरवरी को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।
17 फरवरी को खड्डा उपनगर सहित आसपास की सभी दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने का आह्वान किया गया है। 19 फरवरी को अधिवक्ता और आम लोग अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करेंगे।
इसके बाद भी प्रशासन नहीं माना तो सात मार्च से तहसील के अधिवक्ता जनता के साथ अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और अनशन करने को बाध्य होंगे।
इस बारे में एसडीएम अरुण राय का कहना है कि तहसील मुख्यालय को कहीं और स्थापित करने के लिए किसी प्रस्ताव की जानकारी उन्हें नहीं है। लोगों का अंदेशा निराधार है।