पडरौना। मैन पाॅवर की कमी से मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था लड़खड़ा गई है। करीब एक साल टेंडर के पेंच में कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं हो पाई है। वर्तमान में जिला अस्पताल में जो कर्मचारी थे, वही काम कर रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 120 कर्मचारी बढ़ जाएंगे, जिससे इमरजेंसी, वार्ड और कार्यालयों में काम का दबाव कम हो जाएगा। हालांकि, मेडिकल कॉलेज प्रशासन का दावा है कि शासन स्तर पर डीएमई के पास लंबित हैं, बहुत जल्द स्वीकृति मिल जाएगी।
मेडिकल कॉलेज में मैन पॉवर के टेंडर लेने के लिए कई फर्मों ने आवेदन किया, लेकिन चहेती फर्म को नहीं मिलने के कारण कई बार टेंडर निरस्त कर दिया गया। इसमें जिले के एक जनप्रतिनिधि के चहेते की भी फर्म शामिल हैं, उनको लाभ देने के लिए कई बार ऐसा हुआ। इसके चलते मेडिकल कॉलेज प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़ा होने लगा। आनन-फानन में फिर टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें आकृति को टेंडर मिलने का दावा किया गया है। इसकी स्वीकृति के लिए शासन में डीएमई के पास फाइल करीब एक माह पहले भेजी गई है, लेकिन अब तक इसे स्वीकृति नहीं मिल सकी है। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही कंपनी की ओर से कर्मचारियों को रखा जाएगा। फिलहाल करीब 100 वर्कर अभी काम कर रहे हैं। अब 120 वर्कर में कंप्यूटर ऑपरेटर, डाटा ऑपरेटर, चपरासी आदि रखे जाएंगे। वर्करों की कमी के कारण इमरजेंसी, कार्यालय और वार्डों में ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को अधिक मेहनत करनी पड़ रही है।
टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। स्वीकृति के लिए डीएमई के पास फाइल गई है। स्वीकृति मिलने के बाद ही रिक्त स्थानों पर वर्करों को रखा जाएगा। इसी महीने के अंत तक स्वीकृति मिलने की उम्मीद है।
- डॉ. आरके शाही, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज कुशीनगर