पकवा इनार (कुशीनगर)। प्रदेश सरकार के बजट में कुशीनगर की चर्चा जरूर हुई, लेकिन धन आवंटन के आवंटन के मामले में जिला पिछड़ गया। यही, नहीं पर्यटन विकास के लिए बजट में प्रावधान किए जाने की आस थी, लेकिन बजट में इसका कोई जिक्र नहीं है। इसको लेकर होटल उद्यमी व बौद्ध भिक्षु बजट से काफी निराश हैं। उनका तर्क है कि कुशीनगर बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली है, जहां हजारों की तादाद में देश-विदेश के बौद्ध धर्मवलंबी, अनुयायी व उपासक-उपासिकाएं हर वर्ष आते हैं। उन्हें पर्यटन सुविधाओं को मुहैया कराया जाना चाहिए, जिनसे अब तक कुशीनगर अछूता है। यह सब बजट में धन आवंटन से ही संभव हो पाएगा।
यूपी सरकार में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 2025-26 सत्र का बजट बृहस्पतिवार को पेश किया। बजट आठ लाख आठ हजार 736 करोड़ का है, लेकिन इसमें कुशीनगर के पर्यटन विकास के लिए धन आवंटन का कोई प्रावधान नहीं किया गया है। इसको होटल, बौद्ध भिक्षु समेत अन्य छोटे कारोबारियों का कहना है कि बजट में धन आवंटन होना चाहिए। इससे यहां का विकास होता और पर्यटन को बढ़ावा के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया होते।
-
होटल उद्यमी व बौद्ध भिक्षु बोले:-
-कुशीनगर बौद्धों का प्रमुख पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां बुद्ध का दर्शन व पूजन-अर्चन करने हजारों की संख्या में विश्व के बौद्ध देशों व देश के अलग-अलग राज्यों से मतावलंबी वर्ष पर्यंत आते रहते हैं। इसके बावजूद यह रेलवे, एयरवेज व अन्य बौद्ध तीर्थ स्थलों से सड़क मार्ग से आने की सुविधा भी सुगम नहीं है। अगर बजट में धन का आवंटन कर सीधी बस सेवा से कुशीनगर को जोेड़ा जाए तो पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, लेकिन बजट में कोई चर्चा ही नहीं है। यह चिंतनीय है।
- राजेंद्र मोहन गुप्ता, महाप्रबंधक, लोटस निक्को होटल।
-
पेश बजट में कुशीनगर के पर्यटन विकास के लिए कोई न कोई रकम आवंटित किया जाना चाहिए। बजट में धन आवंटन से ही पर्यटन क्षेत्र को विकसित किया जा सकता है। बजट से पूर्व उम्मीद रहती है कि कोई बड़ा तोहफा मिल सकता है, लेकिन बजट पेश होने के बाद कोई रकम न होना, यहां के पर्यटन विकास की रफ्तार को कम कर सकता है। इस स्थल को हवाई मार्ग, रेल परिपथ व बेहतर सड़क मार्ग से जोड़कर सेवाएं देने की जरूरत है।
- पंकज कुमार, प्रबंधक, द रॉयल रेजीडेंसी होटल।
-
लुंबिनी, बोधगया, सारनाथ व कुशीनगर बौद्ध समुदाय के लिए प्रमुख पवित्र व पूजनीय तीर्थ स्थल हैं। कोई बौद्ध से जुड़े लोग इन स्थलों का भ्रमण करते ही हैं। इनका अपना प्राचीन, धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व है। ऐसे में प्रदेश सरकार को अपने बजट में भारी-भरकम धन का आवंटन कुशीनगर के लिए करना चाहिए। ऐसा न करना इस स्थल की उपेक्षा करना है।
भिक्षु बोध्यांग गौतम।
-
बजट में कुशीनगर के पर्यटन को लेकर कोई धन आवंटन न किया जाना, यहां के विकास के लिए ठीक नहीं है। यहां पर्यटन विकास से होटल, रेस्टोरेंट व धर्मशाला उद्यमियों के कमाई का जरिया बनता तो वहीं, स्थानीय स्तर पर लोगों को छोटे-छोटे रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं। वह उस आय से नए-नए कारोबार करके आर्थिक स्थिति को मजबूत करते, लेकिन बजट में शून्य का भी प्रावधान नहीं हुआ है।
वीरेंद्र कुमार तिवारी, प्रबंधक, बिरला धर्मशाला।
-
इंसर्ट:-
केंद्रीय मंत्री के दौरे का भी बजट पर असर नहीं:-
-रोचक तथ्य यह है कि दो दिन पूर्व केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व प्रदेश के पर्यटन व संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कुशीनगर का एक दिवसीय दौरा किया था। दोनों मंत्रियों ने बुद्ध की भव्य लेटी प्रतिमा का शीश नवाकर दर्शन किया था। विशेष पूजा अर्चना कर ऐतिहासकता, प्राचीनता से अवगत हुए थे। मौजूदा स्थिति में पर्यटन विकास की प्रमुख परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण किया था। लेकिन, बृहस्पतिवार को प्रदेश के पेश बजट में इसका कोई असर नहीं दिखा।