12 हेक्टेयर में होगी कुफरी सिंदूरी प्रजाति के आलू की खेती
कसया (कुशीनगर)। क्षेत्र के बरवा फार्म स्थित राजकीय आलू परिक्षेत्र में इस बार वृहद स्तर पर आलू के बीज का उत्पादन होने जा रहा है। यहां आलू के बीज का उत्पादन 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किया जाएगा। इसमें 450 क्विंटल कुफरी सिंदूरी प्रजाति का आलू का बीज लगेगा। इसे राजकीय शीतगृह अलीगंज (लखनऊ) से मंगाया जा रहा है। बुवाई अक्तूबर में होगी। इसमें लगभग 12 लाख रुपये खर्च होंगे।
रबी बुवाई सत्र 2021-22 में आलू बीजोत्पादन के लिए 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जाएगी। इसके लिए फार्म पर अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि बुवाई अक्तूबर में की जाएगी। फार्म में बीजोत्पादन के अलावा बागवानी व पौधशाला भी है। सुरक्षा के लिहात से फार्म के चारों तरफ चहारदीवारी है। यहां बीजोत्पादन, आम, लीची व अमरूद की बागवानी तथा पौधशाला है। सरकार की तरफ से चलाए जा रहे पौधरोपण कार्यक्रम के तहत इस पौधशाला से इमारती लकड़ी वाले पौधे व फलदार पौधों का वितरण किया जा रहा है।
कुफरी सिंदूरी प्रजाति के आलू की विशेषताएं-
- सड़न बहुत कम होती है।
- तीन से चार माह तक सामान्य वातावरण में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
- पूर्वांचल के जलवायु लिए उपयुक्त प्रजाति है।
- नुकसान कम होता है।
- पाला का असर नगण्य होता है।
- 110 से 130 दिन में फसल तैयार हो जाती है।
- 210 से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है।
रबी बुवाई सत्र 2021-22 में बीजोत्पादन के लिए फार्म में निर्धारित 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कुफरी सिंदुरी प्रजाति के आलू की खेती की जाएगी। बीजोत्पादन के लिए बीज राजकीय शीतगृह अलीगंज लखनऊ से 450 क्विंटल बीज आवंटित हो चुका है। बुवाई के लिए तैयारी शुरू कर दी गई है। बुवाई से लेकर उत्पादन तक लगभग 12 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस खर्च में बीज की कीमत नहीं शामिल होगी। उत्पादन का लक्ष्य दो हजार चार सौ क्विंटल रखा गया है।
पत्रिका सिंह, उद्यान निरीक्षक
32 हेक्टेयर में फैला है बरवा फार्म
बरवा फार्म कुल 32 हेक्टेयर क्षेत्रफल में है। इसमें से 17 हेक्टेयर में आम, लीची व अमरूद का बाग है। फार्म में 12 हेक्टेयर क्षेत्रफल बीजोत्पादन के लिए सुरक्षित है। इसमें आलू, मटर, खीरा, भिंडी समेत अन्य प्रकार का बीजोत्पादन किया जाता है। उसके बाद उसे प्रसंस्करण के लिए राजकीय विधायन केंद्र बस्ती भेज दिया जाता है, लेकिन फार्म से उत्पादित आलू को राजकीय शीतगृह अलीगंज लखनऊ ही भेजा जाता है। वहीं, फार्म में 0.4 हेेक्टेयर में पौधशाला है। इसमें सागौन, आम, लीची व अमरूद समेत अन्य प्रजाति के पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा 2.6 हेक्टेयर में आवास, सड़क, सिंचाई के लिए पक्की नाली, नलकूप, चहारदीवारी, शीतगृह आदि हैं।