पडरौना। जिला मुख्यालय के दमवतिया स्थित सरस्वती चौक से खिरकिया तक करीब 12 किलोमीटर लंबा बाईपास का अधूरा पड़ा निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद जगी है। नाराज अधिकांश किसान सड़क निर्माण के लिए जमीन देने को तैयार हो गए हैं, जिसके बाद पैमाइश समेत अन्य कार्रवाई शुरू कर दी गई।
मंगलवार को दो किसानों ने अपनी जमीन की रजिस्ट्री भी करा दी। हालांकि, कुछ किसान अभी वर्तमान सर्किल रेट पर जमीन देने की बात पर अड़े हैं।
जनपद मुख्यालय के पडरौना शहर में आए दिन लगने वाले जाम से निजात दिलाने के लिए सरस्वती चौक से हरका और पडरौना में मुख्य पश्चिमी गंडक नहर होते हुए खिरकिया तक करीब 12 किलोमीटर लंबी बाईपास सड़क के निर्माण कार्य की स्वीकृति मिली। सड़क की जद में आए अधिकांश किसानों से जमीन का अधिग्रहण कर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। जिला मुख्यालय बनने के बाद पडरौना शहर की सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए शासन ने करीब पांच वर्ष पहले बाईपास सड़क को मंजूरी दी थी। इसके बाद सड़क निर्माण को लेकर विभागीय कार्रवाई शुरू कर पीडब्ल्यूडी को कार्यदायी संस्था नामित किया गया।
निर्माण की जद में आए कुल किसानों में से अधिकांश किसानों ने अपनी दे दी, लेकिन करीब 20 किसानों ने खेत में हुई बोरिंग, उसमें लगे पेड़ और आबादी क्षेत्र में बने घर का मुआवजा देने की मांग करते हुए जमीन देने से इन्कार कर दिया। इनकी यह भी मांग थी कि करीब पांच वर्ष पहले सड़क के लिए जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन भूमि इस समय ली जा रही है, इसलिए उन्हें वर्तमान सर्किल रेट से मुआवजा दिया जाए। इसके चलते अभी तक दो किलोमीटर सड़क और उसके बीच में पड़ने वाले पुल का निर्माण कार्य रुका हुआ था। इस समस्या को सुलझाने के लिए करीब एक माह पहले राज्यसभा सांसद आरपीएन सिंह व सदर विधायक मनीष जायसवाल ने पीडब्ल्यूडी के एई सूबेदार यादव व अन्य अधिकारियों के साथ मेडिकल काॅलेज हरका से खिरकिया तक सड़क का निरीक्षण किया।