कुशीनगर जिले में गंडक नदी तेजी से बढ़ रही है। यहां अहिरौलीदान गांव के कचहरी टोला के पास गंडक नदी की तरफ से कटान तेज किए जाने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई है। स्थिति ऐसी है कि कटान की जद में कई लोगों के पक्के मकान भी आ सकते हैं जिससे ग्रामीणों की बेचैनी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कटान नहीं रोकी गई तो कचहरी टोला का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है। बाढ़ खंड विभाग ने कटान रोकने के लिए बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है।
गंडक नदी में पानी का बहाव घटने के बाद भी नदी ने एक बार फिर अहिरौलीदान के कचहरी टोला को निशाने पर लेना शुरू कर दिया है। बुधवार को सुबह कचहरी टोला में अचानक गंडक नदी का कटान तेज हो जाने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई है क्योंकि कटान के चलते सकलदेव सिंह, धर्मदेव सिंह, बलिस्टर सिंह, विक्रमा सिंह, रामायन सिंह, विनोद सिंह सहित कई लोगों के पक्के मकान कटान की जद में आ सकते हैं। इससे इन लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। उन्हें आशंका है कि यदि समय रहते कटान को रोकने का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया तो गंडक नदी कभी भी उनके घरों को अपनी धारा में समाहित कर सकती है।
इसकी जानकारी होने पर बाढ़ खंड के एसडीओ एसके प्रियदर्शी, जेई चंद प्रकाश, जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील कुमार यादव, जेई संजय कुमार मौर्य, जेई राकेश कुमार, जेई राजेश कुमार सिंह के साथ गांव के पूर्व प्रधान हीरालाल यादव, किसान मोर्चा के जिला मंत्री जेके सिंह, अरविंद सिंह पटेल, पप्पू सिंह सहित कई लोग मौके पर पहुंचे। बाढ़ खंड की देखरेख में बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। इसके बावजूद गांव के लोग सहमे हुए हैं।
उनका कहना है कि उन्होंने गंडक नदी के उस रौद्र रूप को भी देखा है, जिसके चलते 2012 में अहिरौलीदान का बैरिया टोला और 2017 में कंचन टोला व चित्तू टोला का वजूद गंडक नदी में समा गया था। ठीक उसी तरह की स्थिति एक बार फिर बनती दिखाई दे रही है। बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि कटान रोकने के लिए बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है।