देश की आजादी के पूर्व वर्ष 1934 में द कनोरिया शुगर मिल की स्थापना कप्तानगंज में हुई थी। स्थापना काल से लेकर पिछले पेराई सत्र के पहले तक यह चीनी मिल गन्ना की पेराई करती रही। इस मिल से करीब 30 किलोमीटर की परिधि में किसान अपना गन्ना इस मिल पर देते थे। किसानों का जीविकोपार्जन इस चीनी मिल के सहारे होता था।
इलाज, शिक्षा, किसानों की बेटियों की शादी इस चीनी मिल पर गन्ना आपूर्ति से मिलने वाले भुगतान की रकम से होती थी, लेकिन बाद कुछ वर्षों में भुगतान की स्थिति बिगड़ने के बाद इस पर संकट के बादल मंडराने लगे थे और पिछले साल तक इसने पेराई ही बंद कर दी। यह चीनी मिल चलवाने के लिए किसानों और विभिन्न संगठनों ने कई बार आंदोलन किया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
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बताया जा रहा है कि गन्ना आयुक्त संजय आर भुसरेड्डी की तरफ से इस मामले में गंभीरता दिखाए जाने के बाद दो बार चीनी मिल को नोटिस दिया जा चुका था। 14 फरवरी और 19 जून को दो तिथियों में नोटिस दिया गया था और गन्ना मूल्य भुगतान के बारे में आख्या मांगी गई थी, लेकिन मिल प्रबंध तंत्र ने नियत समय तक कोई जवाब नहीं दिया था। लिहाजा, शुक्रवार को डीएम के निर्देश पर तहसीलदार कप्तानगंज गोपाल कृष्ण त्रिपाठी ने पुलिस बल के साथ पहुंचकर चीनी को सील कर दिया।
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तहसीलदार कप्तानगंज कृष्ण गोपाल त्रिपाठी ने कहा कि इस चीनी मिल पर किसानों के बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए 14 फरवरी 2023 और 19 जून 2023 काे नोटिस जारी किया गया था। आरसी भी हुई। अभी तक चीनी मिल की ओर से भुगतान को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिखाई गई। इस वजह से गन्ना आयुक्त के निर्देश पर चीनी मिल के मुख्य गेट सहित सभी छह गेट को सील कर दिया गया है। जब तक यह मिल किसानों के बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं कर देती, यह सील रहेगी। मौके पर मौजूद चीनी मिल के महाप्रबंधक कार्य नरेंद्र वली को इसे सुपुर्द कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई गन्ना आयुक्त के निर्देश पर की जाएगी।
कप्तानगंज चीनी मिल महाप्रबंधक कार्य नरेंद्र वली ने कहा कि किसानों के बकाया गन्ना मूल्य को यथाशीघ्र चुकाया जाएगा। प्रशासन से चीनी मिल को मुक्त कराते पेराई शुरू कराई जाएगी।