पडरौना। यातायात माह के बावजूद शहर में जाम से निपटने के लिए कोई इंतजाम नहीं दिख रहा है। सोमवार को सुबह 10 बजे से ऐसा जाम लगा कि शाम को पांच बजे तक वाहन रेंगते रहे। दोपहर में करीब तीन किमी लंबा जाम लगा रहा, इसमें दो गर्भवती महिलाओं को लेकर करीब एक घंटे तक दो एंबुलेंस फंसी रहीं। दर्द से गर्भवती कराहती रहीं। गंभीर हालत में एक को खड्डा और दूसरे को रामकोला सीएचसी से मेडिकल कॉलेज के लिए डॉक्टरों ने रेफर किया था।
जाम में सीओ पडरौना की गाड़ी भी करीब 45 मिनट तक फंसी रही, जाम लगने का मुख्य कारण नो एंट्री के बाद भी ट्रकों का शहर में दाखिल होना बताया जा रहा है। तीन किमी सफर पूरा करने में लोगों को एक घंटा पांच मिनट लगा।
ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड भी परेशान नजर आए, जबकि ट्रैफिक इंस्पेक्टर और अधिकांश सिपाही नजर नहीं आए। शहर को जाम से मुक्त कराने के लिए प्रशासनिक और पुलिस अफसरों की ओर से योजनाएं बनाई गईं। हाल ही में यातायात माह में इसके लिए अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करने की योजना तैयार की गई है, लेकिन जो भी तैयारियां हो रही है, उसका असर धरातल पर नहीं दिख रहा है।
इसकी वजह जिम्मेदारों की लापरवाही बताई जा रही है। सोमवार को समान्य तौर पर शहर में जाम लगता है, लेकिन इस बार कसया की ओर से आने में छावनी के अंतिम छोर से लेकर सुभाष चौक, गंडक पुल से बलुचहा पुल तक, सुभाष चौक से रामकोला रोड पर बावली चौक तक, कठकुईया रोड, स्टेशन रोड, सुभाष चौक से तिलक चौक, छवनी से कुबेरस्थान रोड तक पूरे शहर में जाम लगा था। इसके चलते यातायात व्यवस्था भी लड़खड़ा गई थी।
दिन में एक बजे छावनी के बाटमाप कार्यालय से लेकर गंडक नहर पुल तक पांच ट्रक जाम में दिखे, इसके अलावा दो एंबुलेंस भी फंसे रहे, एंबुलेंस को रास्ता नहीं मिला, लेकिन मुख्यालय की ओर से पडरौना आ रहे सीओ की गाड़ी को रास्ता होमगार्डों से बाकी वाहनों को रोकर कर रास्ता दिलाया।
गंडक नहर पुल पर सिर्फ दो होमगार्ड नजर आए, जबकि कुबरेस्थान चौक पर तीन होमगार्ड मोर्चा संभाले। खड्डा की रहने वाली नागवंती को प्रसव पीड़ा थी। घरवाले उसे तुर्कहा सीएचसी पर लेकर गए, जहां से डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताकर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया।
ससुर डेबा यादव ने बताया कि खड्डा से पडरौना आने में सिर्फ 45 मिनट लगा जबकि पडरौना मेडिकल कॉलेज करीब पांच किमी आने में एक घंटे लग गए। सिर्फ ईश्वर को याद किया जा रहा था कि कोई अनहोनी न हो।
जाम इतना लंबा लगा था कि एंबुलेंस का चालक भी गर्भवती महिला की छटपटाहट देख कर घबरा गया था। वहीं रामकोला सीएचसी पर गर्भवती नजमा को डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जिस एंबुलेंस से यह रामकोला सीएचसी से मेडिकल कॉलेज जा रही थी, वह भी एंबुलेंस जाम में करीब सवा घंटा फंसा रहा।