पिपरा बाजार। विशुनपुरा ब्लॉक के आंगनबाड़ी केंद्रों पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आ रही हैं। कहीं चार माह से कोटेदार की ओर से अनाज नहीं दिया गया है, तो कहीं बच्चों को गर्म भोजन उपलब्ध कराने के लिए आवंटित बजट का इस्तेमाल नहीं हुआ है। इससे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को सरकारी पोषण योजनाओं का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है। ब्लॉक के 300 आंगनबाड़ी केंद्रों पर 24 हजार से अधिक लाभार्थी पंजीकृत हैं।
इनमें सात माह से छह वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं और धात्री माताएं शामिल हैं। केंद्रों के माध्यम से लाभार्थियों को पुष्टाहार उपलब्ध कराने के साथ बच्चों को गर्म पका भोजन देने की व्यवस्था है। हालांकि, सेखुई छपरा, बेतिया, भुईसोहरा, मोतीपुर और बगपर्दा गांवों के लोगों ने आरोप लगाया कि कई माह से बच्चों को पुष्टाहार और गर्म भोजन नहीं मिल रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि कुछ केंद्रों पर निर्धारित मात्रा में पुष्टाहार नहीं दिया जाता, जबकि कुछ जगह नियमित संचालन भी नहीं होता है। आरोप है कि अधिकारियों के निरीक्षण की जानकारी पहले मिल जाने पर ही केंद्रों पर व्यवस्था दुरुस्त दिखाई देती है। वहीं, स्थानीय स्तर पर शिकायत करने में भी ग्रामीणों को परेशानी होती है।
273 कार्यकत्रियां और 199 सहायिकाएं तैनात
ब्लॉक में आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन के लिए 273 कार्यकत्रियां और 199 सहायिकाएं तैनात हैं। इन्हें प्रतिमाह मानदेय दिया जाता है। करीब 10 सहायिकाओं का मानदेय अभी रुका हुआ है। वहीं, तीन-चार माह पहले नियुक्त 83 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने भी काम शुरू कर दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, कई कार्यकत्रियां और सहायिकाएं अपने ही गांव में तैनात हैं। ऐसे में आपसी संबंध खराब होने और विवाद की आशंका के कारण लोग शिकायत करने से कतराते हैं। खेतीबाड़ी और मजदूरी में व्यस्त रहने के कारण भी कई महिलाएं आंगनबाड़ी केंद्रों से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं ले पाती हैं।
कोट
कई गांवों में कोटेदार की ओर से अनाज नहीं दिए जाने और गर्म भोजन के लिए आवंटित बजट का इस्तेमाल नहीं होने की शिकायतें मिली हैं। इनकी जांच कराई जा रही है। पुष्टाहार नहीं मिलने की शिकायतों के बाद संबंधित केंद्रों का सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- सीमा सिंह, सीडीपीओ, विशुनपुरा ब्लॉक