कुशीनगर। जिले के छह निजी अस्पतालों में मरीजों की खरीद के स्टिंग ऑपरेशन के बाद डीएम के आदेश पर जांच शुरू हो गई है। इसमें सामने आया है कि कसया में संचालित अस्पताल का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। पडरौना में तैनात डॉक्टर अस्पताल छोड़कर चले गए हैं। जांच शुरू होने से निजी अस्पताल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
बिहार से यह जिला सटे होने के कारण इलाज के नाम पर मरीजों को ठगने का खेल खूब होता है। सोशल मीडिया पर करीब डेढ़ माह पूर्व एक स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो वॉयरल हुआ। इसमें बिहार से मरीजों को दलाल द्वारा कुशीनगर के निजी अस्पतालों में बेहतर इलाज का झांसा देकर पहुंचाना बताया गया है। इसमें इनको कमीशन भी अस्पताल संचालकों की ओर से दिया जाता है। गोरखपुर तक यह नेटवर्क जुड़ा है। गोरखपुर के भी कई अस्पतालों का नाम सामने उस वीडियो में आया था। मानवाधिकार आयोग के संज्ञान लेने के बाद डीएम विशाल भारद्वाज ने जांच का निर्देश दिया। पडरौना शहर के जीवन रक्षक अस्पताल सोहरौना में एसडीएम ब्यास नारायण उमराव और डिप्टी सीएमओ डॉ. राकेश गुप्ता पूर्व में कई बार गए। कुछ दिन तक अस्पताल पर ताला लगा रहा। मंगलवार की शाम को एसडीएम पहुंचे तो सिर्फ कर्मी व संचालक मिले। उन लोगों ने बताया इन दिनों अस्पताल में मरीजों का इलाज नहीं किया जा रहा है, क्योंकि जो डॉक्टर थे, वह छोड़कर चले गए हैं। कर्मियों का नाम नोट कर टीम लौट गई। वहीं कसया के दीनदयाल अस्पताल का रजिस्ट्रेशन तक नहीं है। अवैध तरीके से संचालित होने वाले अस्पताल पर अभी तक जिम्मेदारों की ओर से कार्रवाई भी नहीं हो सकी है। हाईवे किनारे यह अस्पताल संचालित हो रहा है। तमकुहीराज के फहान अस्पताल पर की भी जांच चल रही है। इसकी जांच पडरौना, तमकुहीराज और कसया एसडीएम कर रहे हैं। 30 अप्रैल तक मानवाधिकार आयोग को इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेजना है। एसडीएम पडरौना ब्यास नारायण उमराव ने बताया कि डीएम के आदेश पर अस्पतालों की जांच की जा रही है। पडरौना में चार अस्पताल हैं। जल्द ही जांच रिपोर्ट सौंप दी जाएगी।