पडरौना। सोमैया आर्गेनिक्स इंडिया लिमिटेड बसहिया उर्फ कप्तानगंज के नाम से डिस्टलरी फैक्ट्री के लिए 1970 में महामहिम राज्यपाल से करीब 29 एकड़ जमीन लीज पर ली गई थी। मौके से डिस्टलरी गायब है और इस जमीन पर लोगों ने अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर खतौनी में नाम दर्ज करा लिया है। इतना ही नहीं, एक बैंक से पांच करोड़ रुपये ऋण भी लेने का दावा किया गया है। इसकी शिकायत पर डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने पांच सदस्यीय जांच टीम गठित की है। जांच टीम के सामने शिकायतकर्ता सोमवार को अपना पक्ष रखा।
कप्तानगंज कस्बे के रमेश अग्रहरि ने डीएम को साक्ष्य के साथ शिकायती पत्र देकर आरोप लगाया था कि सोमैया आर्गेनिक्स इंडिया लिमिटेड बसहिया उर्फ कप्तानगंज के नाम से डिस्टलरी फैक्ट्री के लिए 1970 में महामहिम राज्यपाल से करीब 29 एकड़ जमीन लीज पर ली गई थी। अभिलेखों में फर्जीवाड़ा कर कई लोगों ने जमीन पर अपना नाम दर्ज करा लिया। वहां पर बंजर, आबादी और राजकीय भूमि अभिलेखों में दर्ज है। एक व्यक्ति की ओर से एक बैंक से इसी जमीन पर पांच करोड़ रुपये ऋण भी लिया गया है।
लीज पर ली गई जमीन के बारे में कप्तानगंज के रजिस्ट्रार ने दावा किया है कि यह बैनामा की भूूमि है। जबकि, इसका लिखित व बैनामा किस व्यक्ति के नाम से है, इसका कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं करा सके। मौके पर डिस्टलरी नहीं है, सिर्फ चीनी मिल ही बची है। जांच टीम में सहायक महानिरीक्षक निबंधन भोला शंकर वर्मा, हाटा एसडीएम योगेश्वर सिंह, कप्तानगंज के एसडीएम, जिला शासकीय अधिवक्ता संतोष कुमार द्विवेदी, जिला गन्ना अधिकारी हुदा सिद्दीकी शामिल हैं। कप्तानगंज के एसडीएम मोहम्मद जफर ने बताया कि जांच के लिए टीम गठित हुई है। आज शिकायतकर्ता ने लिखित में अपना पक्ष दिया है। दूसरे पक्ष ने अपनी बात नहीं रखी है। जांच रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।