तमकुहीरोड। गन्ना बुवाई से कटाई तक किसी न किसी भाग में कीटों का प्रकोप होता रहता है। कीटों के प्रकोप से औसतन 20 से 25 प्रतिशत उपज घट जाती है तथा चीनी परता भी प्रभावित होता है। तापमान बढ़ने से गन्ना फसल में अंकुरबेधक कीट का प्रकोप होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वसंतकालीन गन्ने को इस कीट से बचाव के लिए मसाक्रा 4% दानेदार का गन्ना बोते समय नाली में प्रयोग करना चाहिए। इससे न केवल कीट पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकता है, बल्कि उपज बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच गोरखपुर के पूर्व सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि अंकुरबेधक कीट की सूड़ी भूरे मटमैले रंग की होती है तथा पीठ पर बैगनी रंग की धारिया पाई जाती है। यह पौधे के मुलायम तने में सूक्ष्म छेद बनाकर अंदर घुस जाती है और गन्ने के गोंफ-सीका को खाती हुई नीचे की तरफ आ जाती है। इसकी वजह से गोंफ-सीका सूखने लगता है। इसे खींचने पर आसानी से निकल जाता है, जबकि किनारे की दोनों पत्तिया हरी रहती है। इस कीट के प्रकोप से 20 से 25% पौधे नष्ट हो जाते हैं। इससे उपज के साथ चीनी का परता भी कम हो जाता है। उनकी सलाह में गन्ने की फसल को अंकुरबेधक कीट से बचाने के लिए कीट से प्रभावित पौधों को काट कर निकाल देना चाहिए और गर्मी के दिनों में भरपूर सिंचाई करना चाहिए। यही नही इस समय बसंतकालीन गन्ना बोते समय उसके नाली में आठ किग्रा प्रति एकड़ की दर से मसाक्रा- 0.4% दानेदार कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए। इसी तरह गन्ने के साथ बोई गई मिर्चा, प्याज, भिंडी आदि फसलों की पतियों को में काटने और उसका रस चूसने वाले कीट नियंत्रण के लिए रेन-30 कीटनाशक की एक मिली लीटर को दो लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से भी दीमक सहित अन्य कीटों से बचाव किया जा सकता है |