लक्ष्मीगंज। क्षेत्र के पगार छपरा गांव के संकटमोचन मंदिर परिसर में बृहस्पतिवार को 13 दिवसीय श्री रुद्र महायज्ञ शुरू हुआ। यज्ञ के पहले दिन कथा वाचक ने सृष्टि की उत्पत्ति की कथा सुनाई।
कथा वाचक पंडित प्रदीप सागर जी महाराज ने कहा कि ऋग्वेद में सृष्टि की उत्पत्ति की कथा विस्तार से दी गई है। उसके अनुसार प्रारंभ में चारों ओर केवल अंधकार और जल था। उस समय भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर योगनिद्रा में विराजमान थे। उसी समय भगवान विष्णु की नाभि से एक कमल प्रकट हुआ। कमल पर भगवान ब्रह्मा जी प्रकट हुए। ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की प्रेरणा से सृष्टि की रचना आरंभ की। उन्होंने सबसे पहले आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी जैसे पंचमहाभूतों की रचना की। इसके बाद ब्रह्मा ने देवताओं, ऋषियों, मनुष्यों, पशु-पक्षियों तथा समस्त जीव-जगत की उत्पत्ति की। सृष्टि के पालन का कार्य भगवान विष्णु को और संहार का कार्य शिव को सौंपा गया। इस प्रकार ब्रह्मा, विष्णु और शिव को सृष्टि के सृजन, पालन और संहार का आधार माना गया।
इस दौरान आयोजक काशीनाथ पांडेय, रामबचन सिंह, जय सिंह, कन्हैया चौधरी, धूप सिह, पवन सिंह, शोभा सिंह मौजूद रहीं।