रामकोला (कुशीनगर)। नगर के वार्ड नंबर दस फीडर लाइन मुहल्ले में कमरे में अंगीठी जलाकर सोए मिले मां-बेटे अचेत हालत में मिले। शनिवार की सुबह करीब 10 बजे मुहल्ले के लोगों ने दरवाजा तोड़कर दोनों को को बाहर निकाला। रामकोला सीएचसी में प्राथमिक उपचार के बाद इन्हें मेडिकल कॉलेज गोरखपुर रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ठंड से बचने के लिए मां-बेटा कमरे में अंगीठी जलाकर सोए थे।
फीडर लाइन वार्ड निवासी गोविंद गुप्ता की बाजार में किराने की दुकान है। घर में केवल गोविंद और उनकी मां ही रहती हैं। शुक्रवार की शाम को गोविंद दुकान बंद करके घर पहुंचे और मां विद्या देवी के साथ खाना खाकर कमरे में सोने चले गए। एक ही कमरे में सो रहे मां-बेटे ने गर्मी के लिए कमरे में अंगीठी जला रखी थी। अनुमान है कि रात में अंगेठी की आग से कमरे में ऑक्सीजन की कमी हो गई और दम घुटने से मां-बेटा अचेत हो गए ।
शनिवार को सुबह करीब 10 बजे तक मां-बेटा कमरे से बाहर नहीं निकले तो अगल-बगल के लोगों ने दरवाजा खटखटा कर जगाने का प्रयास किया। जानकारी होने पर वार्ड के सभासद हर्ष सुरी, भाजपा नेता प्रदीप वर्मा, हरि, ओमप्रकाश साहू सहित कई लोग वहां पहुंचे। दरवाजे को तोड़ा गया तो मां-बेटा बिस्तर पर अचेत पड़े थे। इसकी सूचना पुलिस को देने के साथ ही लोगों ने अचेत मां-बेटे को तत्काल रामकोला सीएचसी पहुंचाया। इलाज के बाद हालत में थोड़ा सुधार आया, लेकिन डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के लिए रेफर कर दिया।
इस संबंध में रामकोला सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर रजनीश श्रीवास्तव ने बताया कि अंगीठी जलने के लिए लकड़ी तथा भूसी भरी गई थी। आग जलने से निकली कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस के कारण मां-बेटे बेहोश हो गए थे। बेहतर इलाज के लिए इन्हें गोरखपुर रेफर किया गया है।