हर मौसम में रंग-बिरंगे फूलों से गुलजार दिखेंगे हिरण्यवती नदी के तट
पडरौना (कुशीनगर)। महात्मा बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर से देसी-विदेशी पर्यटकों को देर तक जोड़े रखने और यहां पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए डीएम की तरफ से प्रयास शुरू कर दिया गया है। भगवान बुद्ध के अंतिम क्षणों की साक्षी मानी जाने वाली हिरण्यवती नदी को मनोरम बनाने के लिए करुणासागर तट से बुद्ध घाट होते हुए देवरिया रोड स्थित बंधे तक ऐसे फूलों वाले पेड़-पौधे लगाए जाएंगे, जो प्रत्येक मौसम में एक के बाद एक अपने रंग-बिरंगे फूलों से क्षेत्र का आकर्षण बढ़ाते रहेंगे। इसके साथ ही नदी की परिक्रमा के लिए दोनों किनारे पॉथ वे बनाया जाएगा। इसके अलावा हिरण्यवती नदी में नौकायन का प्रबंध भी होगा, जिससे पर्यटक नदी के रास्ते भी रामाभार स्तूप एवं नदी से लगे सभी प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन कर सकेंगे।
ईसा पूर्व छठी शताब्दी की शुरूआत में यहां भगवान बुद्ध का आगमन माना जाता है। कुशीनगर में ही उन्होंने अपना अंतिम उपदेश देने के बाद महापरिनिर्वाण को प्राप्त किया था। इस प्राचीन स्थान को प्रकाश में लाने का श्रेय जनरल ए कनिंघम और एसीएल कार्लाइल को जाता है, जिन्होंने 1861 में इस स्थान की खुदाई करवाई थी। खुदाई में छठी शताब्दी की बनी भगवान बुद्ध की लेटी विशाल प्रतिमा मिली थी, जो मुख्य महापरिनिर्वाण मंदिर में स्थापित है। इसके अलावा रामाभार स्तूप और माथाकुंवर मंदिर भी खोजे गए थे। 1904 से 1912 के बीच इस स्थान के प्राचीन महत्व को सुनिश्चित करने के लिए भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग ने अनेक स्थानों पर खुदाई करवाई थी और मिले पुरावशेषों को संरक्षित किया गया। उसके बाद से कुशीनगर में हर साल जापान, थाईलैंड, म्यांमार, चीन सहित विभिन्न बौद्घ देशों के पर्यटक आते हैं। इनके अलावा भारत के विभिन्न शहरों से भी पर्यटक भगवान बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली पर दर्शन-पूजन के लिए आते हैं। बौद्घ भिक्षुओं का भी आना-जाना रहता है। इनके आने से यहां के पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलता है।
हिरण्यवती नदी भगवान बुद्ध के अनुयायियों के लिए गंगा के समान है। ऐसे में यहां आने वाले पर्यटकों को अधिक समय तक रोकने के लिए डीएम की तरफ से प्रयास शुरू किया जा रहा है। यहां हिरण्यवती नदी के करुणासागर तट से रामाभार स्तूप के बगल से होते व नदी के किनारे स्थित अन्य बौद्घ स्थलों के रास्ते बुद्घ घाट और देवरिया रोड के पास बने बांध तक दोनों तरफ रंग-बिरंगे फूलों के पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। बड़े वृक्षों में लाल फूल के लिए गुलमोहर, नीले फूल के लिए जक्रांता, पीले फूल के लिए अमलताश लगाए जाएंगे। ऐसे ही छोटे पौधों में मधुमालती, बोगेनवेला, विस्टाविगोनिया सहित 10 प्रकार के पौधे लगाए जाएंगे। इनकी विशेषता यह होगी कि अपने-अपने मौसम के अनुकूल ये पेड़-पौधे भगवान बुद्ध के धाम पर हमेशा अपनी मनोहारी छटां बिखेरते रहेंगे।
गर्मियों में हिरण्यवती नदी का पानी सूख जाता है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नदी की गहराई बढ़ाई जाएगी, ताकि यहां हर मौसम में भरपूर पानी रहे। पर्यटक नाव से नदी के किनारे स्थित प्रमुख स्थलों पर दर्शन-भ्रमण कर सकें। इसकी भी तैयारी की जा रही है। इस नदी के किनारे रंग-बिरंगे फूलों के पेड़-पौधों के अलावा छायादार पौधे भी लगाए जाएंगे। नदी की सफाई कराने के साथ-साथ भविष्य में इसमें बायो डायवर्स (जैव विविधता) के दृष्टिगत मछलियां छोड़ी जाएंगी, जिनके शिकार पर प्रतिबंध होगा।