कुशीनगर। स्वास्थ्य विभाग के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर आवेदन कर अवैध तरीके से निजी अस्पताल चल रहे हैं। जिले में ऐसे अस्पतालों की संख्या सैकड़ों में है। डीएम की सख्ती के बाद सीएमओ ने पोर्टल पर लंबित आवेदनों का सत्यापन कराने के बाद 267 आवेदन निरस्त कर दिए हैं। मानक पूरा करने वाले 140 निजी अस्पताल का पंजीकरण कर इसकी सूची सीएचसी के अधीक्षकों को भेज दी गई है। सीएमओ कार्यालय की ओर से इस सूची को सीएचसी के सूचना पट पर चस्पा कराने को कहा गया है, जिससे लोगों को उस क्षेत्र में संचालित अस्पतालों की हकीकत पता चल सके। जिन अस्पतालों का आवेदन निरस्त हुआ है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए नोडल अफसर को निर्देश दिए गए हैं।
नियम को दरकिनार कर निजी अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने के लिए शासन गंभीर है। करीब एक साल पूर्व निजी अस्पतालों के लिए आने वाले आवेदन का स्थलीय सत्यापन बिना किए रजिस्ट्रेशन नहीं करने के निर्देश दिए गए थे। सीएमओ कार्यालय के पोर्टल पर करीब एक साल के अंदर करीब 600 निजी अस्पतालों के रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन आए। इस अस्पतालों का सत्यापन कर पंजीकरण की जिम्मेदारी नोडल अफसर डॉ. आरके गुप्ता को दी गई थी, लेकिन समय अभाव बताकर अस्पतालों का स्थलीय सत्यापन नहीं किया जा रहा था। पोर्टल पर लंबित पंजीकरण आवेदन की आड़ में संचालक अवैध तरीके से अस्पताल चलाते रहे।
बीच में गीतांजलि हॉस्पिटल रामकोला, कुशवाहा हॉस्पिटल सिधुआ समेत कई अस्पतालों में गर्भवतियों व जच्चा-बच्चा की मौत हो गई। जांच में पता चला कि किसी भी अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नहीं हैं। गीतांजलि हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन ही फर्जी डिग्री पर होने का मामला प्रकाश में आया। इसके बाद डॉ. आरके गुप्ता को हटाकर डॉ. आरडी कुशवाहा को नोडल अफसर बनाया गया। इसके बावजूद इस खेल पर विराम नहीं लगा।
पांच दिन पूर्व डीएचएस की बैठक में डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने सख्त रुख अपनाया तो स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार हरकत में आए और रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर लंबित आवेदनों की जांच व सत्यापन की कार्रवाई पूरी कर मानक पूरा नहीं करने वाले 267 आवेदनों को निरस्त कर दिया। अब तक की जांच में मानक पर खरे सिर्फ 140 अस्पतालों का पंजीकरण हो सका है। 123 अस्पतालों के आवेदन कागजों में मानक पूरा कर रहे हैं। इसका स्थलीय सत्यापन शुरू हो गया है। जानकारों का कहना है कि जिन निजी अस्पतालों का आवेदन निरस्त किया गया है, उनका संचालन बंद कराना स्वास्थ्य विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
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लंबे समय से चल रहा था यह खेल
-वैध निजी अस्पतालों की सूची सार्वजनिक नहीं होने से लंबित आवेदन की आड़ में अवैध तरीके से निजी अस्पताल संचालक इस खेल को अंजाम दे रहे थे। जो आवेदन निरस्त किए गए हैं, उनमें सर्वाधिक एक ही डाक्टर की डिग्री वाले अस्पताल हैं, जबकि उस डाॅक्टर के नाम से पहले से रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
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केस नंबर एक
- रामकोला क्षेत्र के गीतांजलि हॉस्पिटल में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की कुछ माह पूर्व मौत हो गई थी। जांच में पता चला कि अस्पताल की संचालिका डॉ. मीरा शर्मा की मेडिकल की डिग्री फर्जी थी। पुलिस ने मृतका के पति की तहरीर और मेडिकल जांच रिपोर्ट के आधार पर संचालिका व अन्य स्टाफ के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। इसके पूर्व प्रसूता का ऑपरेशन करने की जिम्मेदारी लेने वाले डॉ. विकास मंडलोई और संचालक पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
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केस नंबर दो
एडी हेल्थ के निर्देश पर 26 दिसंबर को सिधुआ के कुशवाहा हेल्थ केयर हॉस्पिटल पर जांच टीम पहुंची। ओटी में सुमित्रा (55) पत्नी किशुन निवासी मडरहवा, नेबुआ नौरंगिया के पित्त की थैली में पथरी का ऑपरेशन झोलाछाप कर रहा था। स्वास्थ्य टीम ने उसे पकड़ लिया। उसने मरीज का टांका लगाने के बाद बात करने के लिए कहा। स्वास्थ्य विभाग की टीम बाहर इंतजार कर रही थी और पीछे के दरवाजे से झोलाछाप व हॉस्पिटल संचालक हरिकेश कुशवाहा भाग निकले। कुबेरस्थान सीएचसी के अधीक्षक डॉ. धीरज सिंह ने अस्पताल संचालक पर प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
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केस नंबर तीन
शहर के खिरिया टोला में अवैध तरीके से संचालित हिंद हॉस्पिटल में प्रसव के बाद 22 दिसंबर को नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के मदरहवा की 24 वर्षीय पूजा कुशवाहा की मौत हो गई थी। परिजनों के हंगामा के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हॉस्पिटल को सील कर दिया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऑपरेशन में लापरवाही का मामला सामने आया था। पडरौना कोतवाली में अस्पताल संचालक परवेज अली और अज्ञात मेडिकल स्टाफ पर प्राथमिकी दर्ज हुई।
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-पोर्टल पर निजी अस्पतालों के पंजीकरण के लिए ऑनलाइन आवेदन में 267 आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं। मानक पूरे करने वाले 140 अस्पतालों का का पंजीकरण किया गया है। इसकी सूची सीएचसी अधीक्षकों को भेज दी गई है। वे अपने यहां दीवारों पर इसे चस्पा कराएंगे ताकि लोग अवैध अस्पतालों में इलाज कराने से बच सकें। अवैध अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने के लिए नोडल अफसर को निर्देश दिए गए हैं। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ, कुशीनगर