पडरौना। म्यांमार के यांगून में फंसे कुशीनगर और बिहार के तीन युवकों की घर वापसी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। भारतीय दूतावास के कॉन्सुलेट जनरल का दूसरे दिन भी मोहम्मद उस्मान के मोबाइल पर संदेश आया था कि उनकी घर वापसी की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद भी परिजनों की चिंता कम नहीं हो रही है।
बुधवार सुबह मोहम्मद उस्मान से परिजनों की बात हुई। बातचीत के दौरान मां की आंखें छलक आईं, लेकिन हिम्मत रखते हुए बेटे को तसल्ली दीं। वहीं युवकों का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, वहां पर उनको दवा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। शहर के महाराणा प्रताप नगर के रहने वाले मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद हसन की बुधवार सुबह भी बात घर वालों से बात हुई। बीच में तीन दिन तक संपर्क नहीं होने से घर वालों की बेचैनी बढ़ गई थी और अनहोनी की आशंका सताने लगी थी। इधर दो दिन से बात होने के बाद परिवार वालों को थोड़ा सकून मिला है, लेकिन बेटों के फंसने व उनकी घर वापसी के लिए परिजन परेशान हैं।
वहीं, व्हाट्सएप पर मैसेज के जरिए मोहम्मद उस्मान ने बताया कि यहां पर कुछ भी अच्छा नहीं लग रहा है। सीतामढ़ी का साथी अनुरंजन पहले से बीमार है। कहने के बाद भी मेरी शुगर की दवा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। युवकों का आरोप है कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर विदेश बुलाया गया और बाद में साइबर नेटवर्क से जुड़े काम करने का दबाव बनाया जाने लगा।
परिवार वालों के मुताबिक, भारतीय दूतावास से हुई बातचीत के बाद उम्मीद जरूर जगी है। मोहम्मद उस्मान के भाई मोहम्मद अमीर ने बताया कि मेरी तबीयत तीन से इसी चिंता में खराब है, चाह कर भी डीएम से शिकायत करने नहीं जा पा रहा हूं। पिता हार्ट के मरीज हैं। वह परेशान हैं और रात में उनको नींद नहीं आ रही है।