परियोजना साकार हुई तो बदल जाएगी रेता क्षेत्र की तस्वीर
पडरौना। गंडक नदी के किनारे बसी दो लाख से अधिक की आबादी को खड्डा विधायक के एक प्रस्ताव ने उम्मीद की नई किरण दिखाई है। विधायक ने खड्डा से भैसहां घाट होते हुए वाल्मीकिनगर तथा पनियहवा से कटाई भरपुरवा होते हुए तमकुहीराज तक टू लेन सड़क का प्रस्ताव दिया है। उप मुख्यमंत्री ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए जल्द ही इसके लिए सर्वे कराने का आश्वासन दिया है। अगर ये सड़कें यथार्थ रूप में आईं तो रेता क्षेत्र में न केवल बाढ़ का स्थायी निदान हो जाएगा, बल्कि क्षेत्र को आवागमन के लिए मुख्यमार्ग भी मिल जाएगा। इससे सैकड़ों साल से उपेक्षित इस क्षेत्र का विकास भी तेजी से होगा।
गंडक नदी कुशीनगर जिले में यूपी और बिहार के बीच सीमा रेखा का काम करती है। जिले का खड्डा, विशुनपुरा, दुदही और सेवरही ब्लॉक के 100 से अधिक गांव गंडक नदी के किनारे हैं। ये गांव हर साल बाढ़ की मार झेलते हैं। पड़ोसी जिला महराजगंज का सोहगीबरवां गांव भी गंडक नदी के दियारा में होने की वजह से मुख्य मार्ग से कटा है। पड़ोसी प्रांत बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले का धनहा, भितहा, ठकरहा, मधुबनी आदि ब्लॉक भी नदी के किनारे हैं, जहां बिहार की तरफ से आवागमन कठिन है। इस क्षेत्र की करीब दो लाख की आबादी आज भी मुख्यमार्ग से बहुत दूर है। वर्ष-2007 में पनियहवा से छितौनी होते हुए तमकुहीरोड तक तक रेल लाइन बिछाने की योजना थी, लेकिन उस पर कार्य नहीं हुआ।
बीते शनिवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य खड्डा क्षेत्र के रामपुर गोनहा में शनि मंदिर तथा 101 सड़कों व पुलों के शिलान्यास अवसर पर आए थे। यहां विधायक जटाशंकर त्रिपाठी ने अन्य मांगों के अलावा चार प्रमुख सड़कों के निर्माण के लिए मांग पत्र सौंपा था। इसमें पनियहवा से तमकुहीराज (एनएच 28 बी से एनएच 28 तक) और खड्डा से वाल्मीकिनगर तक नई सड़क बनाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा एनएच 28 बी से बलकुड़िया-छितौनी-खड्डा होते हुए सिसवा तक सड़क चौड़ीकरण तथा कसया-रामकोला-कोटवा-घुघली मार्ग को फोरलेन बनाने का प्रस्ताव है। इसमें से पनियहवा से तमकुहीराज तक (एनएच 28 बी से एनएच 28 तक) तक करीब 60 किलोमीटर लंबी सड़क बांध के किनारे अगर बनती है तो कुशीनगर के चार ब्लॉक व बिहार के चार ब्लॉक के लोग सीधे मुख्य सड़क से जुड़ जाएंगे। खड्डा से सोहरौना होते हुए भैंसहा घाट के रास्ते वाल्मीकिनगर तक सड़क बन जाने से नदी के दूसरी तरफ बसे महराजगंज जिले के सोहगीबरवां समेत कुशीनगर जिले के आठ गांवों में भी आवागमन का रास्ता मिल जाएगा। नदी के किनारे बसे ये सभी गांव आज भी मुख्य मार्ग से बहुत दूर हैं। इनमें से कई गांव बरसात में मैरूंड हो जाते हैं। प्रशासन को बाढ़ पीड़ितों तक राहत सामग्री पहुंचाने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खड्डा के एसडीएम अरिवंद कुमार ने बताया कि सड़कों व पुलों का निर्माण मानव जीवन के सामाजिक व आर्थिक विकास की मदद करता है। रेता क्षेत्र में विकास के लिए कोई आधारभूत संरचना मौजूद नहीं है। इससे इस क्षेत्र के लोगों का विकास बाधित है। सड़क के अभाव में दियारा में बसे गांवों में आपात स्थिति में मदद पहुंचाना भी मुश्किल काम है। गंडक नदी के भैंसहा घाट पर पक्का पुल व सड़क बनने से यह क्षेत्र तेजी से विकसित होगा।
गंडक नदी के किनारे बने बांध की मरम्मत का कार्य हर साल चलता है। सड़क के अभाव में वहां तक बोल्डर व अन्य सामान की आपूर्ति में दिक्कत आती है। अगर बांध के समानांतरण चौड़ी सड़क बनती है या बांध के ऊपरी सतह को ही पक्की सड़क बनाया जाता है तो बांध की मरम्मत के लिए आवश्यक संसाधन पहुंचाना आसान होगा। आवागमन का बेहतर विकल्प मिलने से क्षेत्र का विकास भी होगा।
एमके सिंह, एक्सईएन बाढ़ खंड कुशीनगर
प्रस्ताव पर मिला है आश्वासन: विधायक
खड्डा आए उप मुख्यमंत्री को रेता क्षेत्र की दिक्कतों से अवगत कराया गया। इसके बाद लखनऊ जाकर व्यक्तिगत रूप से ज्ञापन सौंपा गया है। इसमें पनियहवा से तमकुही (एनएच 28बी से एनएच 28 तक) और खड्डा से सोहरौना होते हुए भैंसहा घाट के रास्ते वाल्मीकिनगर तक सड़क बनाने की मांग प्रमुख है। भैंसहा घाट पर पीपा पुल की जगह पक्का पुल के लिए जिला प्रशासन भी पहले ही प्रस्ताव भेज चुका है। इसके लिए सर्वे भी हो चुका है।
जटाशंकर त्रिपाठी, विधायक खड्डा