तमकुहीरोड। गंडक नदी का डिस्चार्ज रविवार को दोपहर में घट कर साठ हजार क्यूसेक से नीचे आ जाने के बाद भी नरवाजोत बांध पर पानी का दबाव बना हुआ है। नदी कई जगहों पर बांध से सटकर बह रही है। लोगों में भय है कि डिस्चार्ज बढ़ने पर यह बांध की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है। ग्रामीणों ने कहा कि पानी का डिस्चार्ज लंबा चलने वाला है। राहत व बचाव कार्य पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में डिस्चार्ज बढ़ने पर बांध के साथ पिपराघाट के कई गांवों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
नरवाजोत बांध पिछले कई वर्षों से काफी संवेदनशील रहा है। यह बांध लगातार कई सालों से पानी के भारी दबाव झेल रहा है। पिछले साल जब वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में साढ़े पांच लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया था तो गंडक नदी पूरे उफान पर आ गयी थी। जिसके चलते ठोकर का नोज क्षतिग्रस्त हो गया था। इस क्षेत्र मे लोगों को भारी क्षति का सामना करना पड़ा था। उसी क्षति को देखते हुए इस वर्ष शासन की ओर से इस ठोकर पर मरम्मत व अन्य बचाव कार्य के लिए 9.73 करोड़ की एक परियोजना को मंजूरी दी गयी है। जिसके तहत बांध बचाव कार्य कराया जा रहा है। इस परियोजना को पुरा कराने में बाढ़ खंड के अधिकारी कर्मचारी लगे है। गांव के केदार सिंह, प्रभु गुप्ता, कैलाश सिंह, राजू चौहान, प्रताप सिंह आदि लोगों का कहना है कि रविवार को डिस्चार्ज घट कर साठ हजार क्युसेक से नीचे आ गया है। बावजूद इसके नरवाजोत, भंगी टोला, दहारी टोला व तवकल टोला के सामने नदी कहीं बांध के समीप तो कहीं बांध से 30-40 मीटर दूरी पर बह रही है। जो किसी खतरे के संकेत से कम नहीं है। डिस्चार्ज बढ़ने पर खतरा और बढ़ सकता है।