पडरौना। स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने स्पष्ट किया कि अनफिट स्कूल वाहन चलता मिला तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विद्यालय प्रबंधन और प्रधानाचार्य की होगी। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कलेक्ट्रेट सभागार में डीएम की अध्यक्षता में जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति की बैठक हुई। इसमें शिक्षा, परिवहन, पुलिस, लोक निर्माण और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ जिले के विद्यालयों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य शामिल हुए। बैठक में सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी ने स्कूली वाहनों की सुरक्षा और नियमन के लिए चलाए जा रहे ‘मिशन सेफ फ्यूचर-2.0’ की जानकारी दी।
बताया गया कि जिले में कुल 163 स्कूल वाहन अनफिट मिले हैं। संबंधित वाहनों और विद्यालयों को तीन बार नोटिस जारी किया जा चुका है। इनमें से 59 वाहनों के पंजीयन निलंबित किए जा चुके हैं, जबकि अन्य के खिलाफ कार्रवाई जारी है। बैठक में विद्यालय यान सुरक्षा समिति के गठन और उसकी नियमित बैठक की भी समीक्षा की गई। जिला विद्यालय निरीक्षक और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि अब तक केवल 26 विद्यालयों ने समिति की बैठक कराई है।
डीएम ने नाराजगी जताते हुए सभी विद्यालयों में समिति का गठन कर नियमित बैठक कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समिति की बैठक की कार्यवृत्त जिला विद्यालय यान सुरक्षा समिति को उपलब्ध कराना भी अनिवार्य होगा। अगली बैठक से पहले सभी विद्यालयों को यह प्रक्रिया पूरी करनी होगी। डीएम ने निर्देश दिया कि स्कूल वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र, पंजीयन प्रमाणपत्र, परमिट, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद ही उनका संचालन किया जाए। चालकों के ड्राइविंग लाइसेंस की जांच, पुलिस सत्यापन और वर्ष में कम से कम एक बार स्वास्थ्य व नेत्र परीक्षण भी अनिवार्य रूप से कराया जाए। उन्होंने परिवहन विभाग को थानेवार अनफिट स्कूल वाहनों की सूची पुलिस और शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। एआरटीओ ने बताया कि सूची संबंधित विभागों को उपलब्ध करा दी गई है।
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अनफिट वाहन थाने में होंगे निरुद्ध
डीएम ने पुलिस और परिवहन विभाग को निर्देश दिया कि अनफिट स्कूल वाहन संचालित मिलने पर उन्हें थाने में निरुद्ध करें। फिटनेस और आवश्यक दस्तावेज पूरे होने के बाद ही वाहन को अवमुक्त किया जाए। शिक्षा विभाग को भी निर्देश दिए गए कि जिन विद्यालयों के वाहनों की फिटनेस या जरूरी प्रपत्र पूरे नहीं हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही सभी विद्यालयों से प्रमाणपत्र लिया जाए कि उनके यहां संचालित सभी वाहनों का फिटनेस, परमिट और अन्य जरूरी दस्तावेज पूर्ण हैं। डीएम ने कहा कि स्कूली बच्चों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुरक्षा मानकों में लापरवाही मिलने पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बैठक में एआरटीओ प्रशासन समेत संबंधित विभागों के अधिकारी और विद्यालयों के प्रबंधक व प्रधानाचार्य मौजूद रहे।