कुशीनगर। रेलवे फाटक संख्या 13सी पर 28 अगस्त की रात गेटमैन सुधीर मिश्रा पर हुए हमले के मामले में हमलावरों की पहचान पुलिस के लिए चुनौती बन गई है। गंभीर रूप से घायल गेटमैन की याददाश्त भी अब तक पूरी तरह वापस नहीं आई है।
उनका गोरखपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। जीआरपी और कप्तानगंज पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की शुरुआती जांच में गेट खोलने और बंद करने को लेकर किसी व्यक्ति से विवाद होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, हमला किसने और किन परिस्थितियों में किया, यह स्पष्ट नहीं हो सका है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, ट्रेन आने पर फाटक बंद होने के दौरान और ट्रेन गुजरने के बाद फाटक खुलने की स्थिति में भी सिग्नल की बत्ती कई बार नहीं जलती। इससे दूर से यह पता नहीं चल पाता कि फाटक बंद है या खुला।
लोगों ने बताया कि रात में सिग्नल का स्पष्ट संकेत नहीं मिलने से राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी होती है। व्यस्त ढाला होने के कारण जल्दबाजी में फाटक पार करने की कोशिश हादसे का कारण बन सकती है। संवाद