देवसर चुंगी के समीप लीकेज को ठीक करते जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के कर्मचारी।
कुशीनगर। जिले के रास्ते होने वाली पशु तस्करी की खेल पर रोक लगाने के लिए पुलिस ने अपनी मुहिम तेज कर दी है। उनके रडार पर जमानतदार और तस्करों को शरण देने वाले हैं।
सत्यापन के बाद कार्रवाई के जद में आए चार जमानतदारों ने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह केवल एक बार जमानत के लिए आधार कार्ड और फोटो दिए थे, लेकिन 35 और 40 बार कैसे मेरे नाम पर जमानत हुई है, इसकी जानकारी नहीं है।
आरोप है कि कसया थाने के कुछ लोग पशु तस्करों को जमानत दिलाने में मोटी रकम लेकर ऐसा फर्जीवाड़ा कर कोर्ट को गुमराह किए हैं। इसके अलावा जमानत से पहले कागजातों की जांच करने वाले राजस्वकर्मी भी सवालों के घेरे में हैं। जिनकी भूमिका की जांच भी की जा रही है। पांच जमानतदारों की मौत हो चुकी है, पुलिस को शक है कि इनके मरने के बाद भी इनको कागजों में जमानतदार बनाकर कही जमानत ली गई है। इसकी जांच एसपी पुलिस के अलावा एलआईयू से करा रहे हैं।
पूरब से पश्चिम तक फैले पशु तस्करों के खेल का बिहार से सटा होने के कारण कुशीनगर केंद्र बिंदु रहा है। करीब तीन पशु तस्करों की जमानत कुशीनगर जिले के 17 लोग लिए हैं, पुलिस की ओर से कराए गए सत्यापन में पता चला कि एक जमानतदार का अभिलेख में न्यूनतम दस और अधिकतम 40 बार उपयोग किया गया है। संवाद