विदेश में अपने कमरे से बाहर दोस्तों संग दिनेश द्वारा भेजी गई सेल्फी।स्रेत-सोशल मीडिया
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तुर्कपट्टी। रूस के आमूर इलाके में ‘’यामाता पेट्रोलियम एंड गैस प्लांट’’ में काम करने वाले भारतीय कर्मियों को उनकी रुकी तनख्वाह मिल गई है। भारतीय दूतावास की सक्रियता से स्वदेश वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। दिनेश चौरसिया और राजेश गोंड ने बुधवार को परिजनों से हुई बातचीत में यह बात बताई।
कुशीनगर जिले के महुअवां गांव निवासी दिनेश चौरसिया और रहसू गांव निवासी राजेश गोंड ने वीडियो जारी कर भारत सरकार से मदद की गुहार लगाई थी। वीडियो वायरल होते ही रूस स्थित भारतीय दूतावास हरकत में आया और कंपनी प्रबंधन से बात करके कर्मियों को मई महीने का बकाया वेतन दिलाया। दूतावास के हस्तक्षेप के बाद अब कर्मियों की वतन वापसी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
बृहस्पतिवार से 400 से 500 कर्मचारियों का पहला जत्था भारत के लिए रवाना होगा। कर्मियों की वतन वापसी सप्ताह में दो दिन मंगलवार और शुक्रवार को होगी। स्वदेश लौटने वाले सभी कर्मियों को जून और जुलाई का वेतन भी देकर भेजा जाएगा। उम्मीद है कि 15 अगस्त तक सभी 4,000 कर्मचारियों की सुरक्षित वापसी पूरी हो जाएगी। यह खबर मिलते ही दिनेश और राजेश के परिजनों सहित सभी कर्मियों के घरों में खुशी और राहत का माहौल है।
बुधवार को फोन पर बातचीत में दिनेश चौरसिया ने बताया कि आमूर से मास्को पहुंचने में लगभग साढ़े छह घंटे व मास्को से भारत आने में करीब सात घंटे का समय लगता है। अनुमान है कि करीब चार हजार भारतीय कर्मियों की वतन वापसी छह से सात चरणों में 15 अगस्त तक पूरी हो जाएगी। इससे पत्नी संगीता, पुत्र शिवांश और प्रिंस सहित पूरे परिवार में खुशी का माहौल है।