फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: साफ हो रही हिरण्यवती, बिखरेगी अनुपम छटा

विज्ञापन
विज्ञापन
पडरौना। जलकुंभी और कचरे से पटी रहने वाली बौद्ध कालीन हिरण्यवती नदी अब अपने शुद्धिकरण के दौर से गुजर रही है। नदी को न केवल साफ किया जा रहा है, बल्कि इसे एक वैश्विक इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करने की तैयारी है। इसको लेकर नदी की सफाई और पवित्रता को बनाए रखने के लिए विशेष जोर दिया जा रहा है।
विज्ञापन

वहीं, ईको टूरिज्म के रूप में नदी के किनारे विभिन्न प्रजातियों के पौधों को रोपित करने का काम नगरपालिका परिषद कुशीनगर की तरफ से आरंभ कर दिया गया है। इसके अलावा नदी के जलप्रवाह को निर्बाध बनाए रखने के लिए विशेष नहरों से जोड़ने का भी काम चल रहा है। लक्ष्य यह है कि बुद्ध की इस नदी में साल भर स्वच्छ और निर्मल जल का प्रवाह बना रहे।
बौद्धकालीन हिरण्यवती नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए बीते अक्टूबर 2025 में बिंदवलिया पुल से डीएम महेंद्र सिंह, विधायक पीएन पाठक, चेयरमैन किरन जायसवाल की मौजूदगी में महासफाई अभियान की शुरूआत की गई थी। इस अभियान के तहत 9400 मीटर लंबाई में जलकुंभी, खरपतवार व किनारों की सफाई करने का लक्ष्य है। इसमें से अब तक 6600 मीटर लंबाई में सफाई का काम पूरा किया जा चुका है। शेष 2800 मीटर लंबाई में सफाई का कार्य पूरा किया जाना है। जिसे पालिका प्रशासन जल्द पूरा कराने का दावा कर रही है।
विज्ञापन

इसके अलावा नदी के किनारों को ईको टूरिज्म जैसे विकसित करने के लिए विभिन्न प्रजाति के पौधों को रोपित करने का भी काम आरंभ कर दिया गया है। इससे हरियाली तो फैलेगी ही सुदंरता व पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी बनेगा।

हमारा उद्देश्य हिरण्यवती नदी को उसकी प्राचीन गरिमा वापस दिलाना है। सफाई और हरियाली से यहां न केवल पर्यावरण सुधरेगा, बल्कि यह शांति की तलाश में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ध्यान का केंद्र भी बनेगा। भविष्य में आकर्षक लाइटिंग के साथ बेहतर पाथवे भी विकसित किया जाएगा।
- राकेश जायवसवाल, चेयरमैन प्रतिनिधि, नगर पालिका कुशीनगर

इन प्रजातियों के पौधों किया जा रहा रोपण
नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए इसके किनारों पर विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जा रहा है। इसमें पीपल, बरगद, पाकड़, अर्जुन, शीशम, नीम, जामुन, कदंब, बांस ,लेमन ग्रास, और पाकड़ जैसे पारंपरिक वृक्षों को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे मिट्टी का कटाव भी रुकेगा। यह पौधरोपण नेचुरल ऑक्सीजन हब क्षेत्र के रूप में पल्लवित होकर उभरेगा। जिला प्रशासन की योजना है कि नदी के किनारों को इतना आकर्षक बनाया जाए कि आने वाले लाखों विदेशी पर्यटक यहां रुकने को मजबूर हो जाएं।
-
नहरों से जुड़ रही हिरण्यवती
एसडीएम कसया डा. संतराज सिंह ने बताया कि सिचाई विभाग के अधिकारियों के साथ अक्टूबर 2025 में जलप्रवाह बनाए रखने के लिए निरीक्षण किया था। इसमें परसौना माइनर की कुल लंबाई 2.200 किमी में लगभग 700 मीटर हिस्से पर अतिक्रमण मिला था। उसे अतिक्रमण मुक्त कराते हुए नदी से जोड़कर जल प्रवाह शुरू कराया जा रहा है। वहीं, टेकुआटार माइनर से निकलने वाली जमुनिया टेलगुल (लंबाई 1.700 किमी) के लगभग 200 मीटर हिस्से से भी अतिक्रमण हटवाकर माइनर का पानी हिरण्यवती नदी में जल्द ही पहुंचेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें