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बच्चों की मौत की सूचना पर पहुंची स्वास्थ्य टीम 

Thu, 19 Jan 2017 01:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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स्वास्‍थ्य टीम ने गांव पहुंचकर बच्‍चों की जांच की।
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चार दिनों के अंतराल में एक बच्ची और दो नवजात शिशुओं की मौत की जानकारी के बाद विशुनपुरा ब्लॉक के खजुरिया गांव में बुधवार को पहुंची हेल्थ टीम ने बीमार बच्चों की जांच की और दवा वितरण किया। इस दौरान टीम के डॉक्टर विनोद ने लोगों को स्वास्थ्य संबंधी सुझाव भी दिए।
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बुधवार की दोपहर डॉक्टर विनोद के साथ हेल्थ सुपरवाइजर ध्रुव कुमार, फार्मासिस्ट इम्तियाज अहमद, वार्ड ब्वाय आनंद खजुरिया गांव के चौरी टोला में पहुंचे। टीम के मुताबिक जांच में दो बच्चे-मुन्ना की डेढ़ वर्षीया बेटी कविता और ओमप्रकाश के पांच वर्षीय पुत्र कुंदन अस्वस्थ मिले, जबकि गांववालों का कहना है कि बीते एक सप्ताह में ब्यूटी, शेषनाथ, बाल्मीकि, रवि, लक्ष्मी, प्रियंका, संजना, रोहित, मनोहर आदि बीमार बच्चों का इलाज कराना पड़ा है। बहरहाल, टीम ने बीमार बच्चों को दवाएं दीं और अन्य घरों में भी क्लोरीन की गोलियां बांटी।

डॉक्टर विनोद ने गांव के लोगों को बताया कि बच्चों को हर हाल में ठंड से बचाने की कोशिश करें और पीने के लिए उबालने के बाद गुनगुने पानी का उपयोग करें। बीते मंगलवार की दोपहर वीरेंद्र शर्मा की एक वर्षीया बेटी अनुष्का की डायरिया की वजह से मौत हो गई थी। इसके अलावा बीते शनिवार और सोमवार को चौरी टोला के ही अमरजीत और राजीव के परिवार में नवजात शिशुओं ने भी जन्म के कुछ घंटों बाद ही दम तोड़ दिया था।
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हेल्थ सुपरवाइजर ध्रुव कुमार ने बताया कि जांच में दो बच्चे अस्वस्थ पाए गए। उन्हें दवाएं दीं गईं और अन्य घरों में वितरण के लिए गांव की आशा संगीता को क्लोरीन की गोलियां सौंप दी गई हैं। स्वास्थ्य महकमा नहीं देता ध्यान  खजुरिया गांव साल दर साल मासूमों की मौत का दंश झेलता है, लेकिन जिम्मेदारों के रवैये में कोई विशेष अंतर नहीं पड़ता। गांववालों का कहना है कि हो हल्ला होने पर कुछ समय तक मुस्तैदी दिखाई देती है, फिर सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट जाता है। विशुनपुरा ब्लॉक की खजुरिया ग्राम पंचायत के लगभग 7000 लोग छोटे बड़े कुल 11 टोले में आबाद हैं। विभिन्न टोला पर हालिया वर्षों में इंसेफेलाइटिस और डायरिया की वजह से अंजली, छोटी, रोहित, बिलाल, मुनिया, चांदनी, चुलबुल, सावित्री, दिवाकर, राहुल आदि मासूमों की मौत हो गई। वर्ष 2013 की जुलाई में गांव में डायरिया की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई और 50 से अधिक को जिला अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

गांव के लोग सफाई व्यवस्था की शिकायत करते थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। डायरिया के प्रकोप के बाद जब प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे और खुद गंदगी का अंबार देखा, तब जाकर तीन में दो सफाई कर्मचारी बर्खास्त और ग्राम प्रधान का वित्तीय अधिकार सीज कर दिया गया। सितंबर 2013 में डायरिया के प्रसार के कारणों की जांच में खजुरिया पहुंचे तत्कालीन डीडीओ के सामने ही दो पक्षों  में भिड़ंत हो गई थी। मारपीट में ईंट पत्थर चले, 40 से अधिक लोगों को चोटें आईं, जिनमें 12 को गंभीर स्थिति के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया। हंगामा बढ़ा तो पुलिस पहुंची और जांच अधिकारी को  सुरक्षा के दृष्टिकोण से खिसकना पड़ा।
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